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उत्तर प्रदेश उपचुनाव 2024- योगी आदित्यनाथ रैली, अखिलेश यादव प्रचार,

योगी की 15 रैलियों के जवाब में अखिलेश की 14 सभाएं: उपचुनाव में जोर-आजमाइश चरम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विधानसभा उपचुनावों ने राज्य की राजनीति को नई धार दी है। 20 नवंबर को नौ सीटों पर होने वाले मतदान को लेकर सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के बीच इस बार का मुकाबला ज्यादा तीखा और रणनीतिक बन गया है।

अखिलेश यादव ने इस बार हर सीट पर खुद प्रचार किया। 14 सभाओं और एक रोड शो के जरिए सपा ने अपने “PDA फॉर्मूले” को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

नौ सीटों पर 90 उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला है। इनमें करहल, कुंदरकी, कटेहरी, और सीसामऊ जैसी सपा की मजबूत सीटें हैं। वहीं, फूलपुर, मझवां और गाजियाबाद भाजपा की पकड़ वाली सीटें मानी जा रही हैं।

बसपा ने प्रत्याशी उतारे हैं, लेकिन मायावती प्रचार से दूर रहीं। बसपा की भूमिका सपा और भाजपा दोनों के समीकरण बिगाड़ सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये उपचुनाव 2027 विधानसभा चुनावों का रुख तय करेंगे। अगर भाजपा “बंटेंगे तो कटेंगे” के नारे को सफल साबित करती है, तो यह नारा 2027 तक जारी रह सकता है। वहीं, सपा के PDA फॉर्मूले की सफलता से विपक्ष को नई ऊर्जा मिलेगी।

कांग्रेस ने उपचुनाव से दूरी बनाए रखते हुए सपा को सैद्धांतिक समर्थन दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि “2024 लोकसभा चुनावों में भाजपा को मिली हार के बाद योगी सरकार को बेहतर प्रदर्शन का दबाव है।”

अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर अभी चुनाव नहीं हो रहा है। यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है।

20 नवंबर के उपचुनावों के नतीजे भाजपा और सपा दोनों के लिए निर्णायक साबित होंगे। यह साफ होगा कि “बंटेंगे तो कटेंगे” का संदेश असरदार है या PDA का फार्मूला।

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