योगी और अखिलेश आमने-सामने: 2027 विधानसभा का भविष्य तय करने वाला उपचुनाव
विशेष संवाददाता: मनोज शुक्ल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विधानसभा उपचुनावों ने राज्य की राजनीति को नई धार दी है। 20 नवंबर को नौ सीटों पर होने वाले मतदान को लेकर सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के बीच इस बार का मुकाबला ज्यादा तीखा और रणनीतिक बन गया है।
राजनीतिक दांव
योगी आदित्यनाथ के “बंटेंगे तो कटेंगे” और अखिलेश यादव के “PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक)” के फार्मूले की परीक्षा इन उपचुनावों में होगी। जहां भाजपा को अपनी पकड़ मजबूत रखनी है, वहीं सपा को लोकसभा चुनाव 2024 के बाद बनाए गए माहौल को बरकरार रखने की चुनौती है।
मुख्य बिंदु
सीएम योगी का प्रचार अभियान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच दिनों में 15 रैलियां और 2 रोड शो कर भाजपा का परचम लहराने की कोशिश की। भाजपा की “टीम-30” और सहयोगी दल भी पूरी तरह मैदान में हैं।
अखिलेश की रणनीति
अखिलेश यादव ने इस बार हर सीट पर खुद प्रचार किया। 14 सभाओं और एक रोड शो के जरिए सपा ने अपने “PDA फॉर्मूले” को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
विधानसभा सीटें और मुकाबला
नौ सीटों पर 90 उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला है। इनमें करहल, कुंदरकी, कटेहरी, और सीसामऊ जैसी सपा की मजबूत सीटें हैं। वहीं, फूलपुर, मझवां और गाजियाबाद भाजपा की पकड़ वाली सीटें मानी जा रही हैं।
बसपा का कमजोर प्रदर्शन
बसपा ने प्रत्याशी उतारे हैं, लेकिन मायावती प्रचार से दूर रहीं। बसपा की भूमिका सपा और भाजपा दोनों के समीकरण बिगाड़ सकती है।
उपचुनाव की राजनीतिक अहमियत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये उपचुनाव 2027 विधानसभा चुनावों का रुख तय करेंगे। अगर भाजपा “बंटेंगे तो कटेंगे” के नारे को सफल साबित करती है, तो यह नारा 2027 तक जारी रह सकता है। वहीं, सपा के PDA फॉर्मूले की सफलता से विपक्ष को नई ऊर्जा मिलेगी।
योगी सरकार की स्थिरता पर असर नहीं
इन उपचुनावों के परिणाम योगी सरकार की स्थिरता को प्रभावित नहीं करेंगे, लेकिन भाजपा के लिए कार्यकर्ताओं का मनोबल और जनाधार बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
कांग्रेस का समर्थन
कांग्रेस ने उपचुनाव से दूरी बनाए रखते हुए सपा को सैद्धांतिक समर्थन दिया है।

करहल, सीसामऊ और मीरापुर सीटों पर सपा, जबकि फूलपुर और मझवां पर भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि “2024 लोकसभा चुनावों में भाजपा को मिली हार के बाद योगी सरकार को बेहतर प्रदर्शन का दबाव है।”
मिल्कीपुर सीट का इंतजार
उपचुनावों में उम्मीदवारों की स्थितिर उपचुनावों में उम्मीदवारों की स्थिति
अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर अभी चुनाव नहीं हो रहा है। यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है।
20 नवंबर के उपचुनावों के नतीजे भाजपा और सपा दोनों के लिए निर्णायक साबित होंगे। यह साफ होगा कि “बंटेंगे तो कटेंगे” का संदेश असरदार है या PDA का फार्मूला।
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विशेष संवाददाता
मनोज शुक्ल