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शिविर तैयार करने को लेकर काम में जुटा श्रमिक

महाकुम्भ 2025: ऐसे तैयार हो रहे शिविर, जानें कैसा होगा स्वरूप?

प्रयागराज: 2025 में होने वाले महाकुम्भ के लिए प्रयागराज में तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार महाकुम्भ को एक ईकोफ्रेंडली स्वरूप प्रदान करने के लिए खास ध्यान दिया जा रहा है। इस आयोजन के लिए देश भर से आए 25,000 से अधिक कारीगर और श्रमिक बांस और लकड़ी से अस्थाई शिविरों और प्रवेश द्वार का निर्माण कर रहे हैं। महाकुम्भ न केवल आस्था का एक बड़ा आयोजन है, बल्कि यह दूसरे प्रदेशों से आए श्रमिकों के लिए रोजगार का भी बड़ा माध्यम बन रहा है।

महाकुम्भ के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बार शिविरों को पॉलीथीन मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का निर्णय लिया है। सरकार की यह मंशा साधु-संतों और संस्थाओं द्वारा भी पूरी की जा रही है, जिन्होंने बांस से बने शिविर और प्रवेश द्वार निर्माण को प्राथमिकता दी है। इस बार 8,000 से अधिक संस्थाएं महाकुम्भ क्षेत्र में अस्थाई शिविर बनाएंगी, जो पिछले कुम्भ की तुलना में डेढ़ गुना अधिक हैं। इनमें से 4,500 संस्थाएं सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए अपने शिविर लगाएंगी।

महाकुम्भ के तहत बांस से बने शिविरों की विशेष अहमियत है। देवरहा बाबा न्यास के महंत राम दास का कहना है कि महाकुम्भ और माघ मेला में त्रिवेणी की रेती पर कुटिया संस्कृति का पालन किया जाता है, जो बांस से बने शिविरों में पूरी तरह से नज़र आती है। यही कारण है कि धार्मिक संस्थाएं बांस से बने शिविरों को प्राथमिकता दे रही हैं।

महाकुम्भ के शिविरों और प्रवेश द्वारों के निर्माण में विभिन्न राज्यों से आए कारीगर और श्रमिकों की बड़ी भूमिका है। बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, और मध्य प्रदेश से 25,000 से अधिक श्रमिक इस कार्य में लगे हुए हैं। बिहार के पूर्णिया से आए कारीगर शंभू का कहना है कि इस बार महाकुम्भ में बांस से बने शिविरों की अधिक मांग है। इन श्रमिकों को इस कार्य में रोजगार मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

महाकुम्भ 2025 का आयोजन 4,000 हेक्टेयर में किया जा रहा है, जिसमें 25 सेक्टर बनाए जा रहे हैं और हर सेक्टर में 400 से अधिक संस्थाएं स्थापित की जा रही हैं। इन संस्थाओं को स्थापित करने के लिए हजारों श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर भी दारागंज, हेतापट्टी, मलवा छतनाग, झूंसी आदि क्षेत्रों के कारीगरों को महाकुम्भ में काम मिला है।

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