“‘एक देश, एक टैक्स’ का नारा भाजपा के लिए झूठा साबित हो रहा है। नई टैक्स स्लैब और बढ़ी दरों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर भ्रष्टाचार और जनता पर बोझ बढ़ाने के आरोप लगाए हैं।”
नई दिल्ली । ‘एक देश, एक टैक्स’ का नारा भाजपा सरकार के लिए विवाद का कारण बन गया है। नई टैक्स स्लैब और दरों में बदलाव को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखे आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि नई टैक्स नीति भ्रष्टाचार बढ़ाने और जनता पर बोझ डालने के लिए बनाई गई है।
क्या है विवाद?
2017 में लागू किए गए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) को ‘एक देश, एक टैक्स’ के रूप में प्रस्तुत किया गया था। हालांकि, अब इसमें लगातार नई दरें और स्लैब जोड़े जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यह न केवल इस नारे का विरोधाभास है, बल्कि इससे कर चोरी और भ्रष्टाचार भी बढ़ रहा है।
‘जनता पर बढ़ा बोझ’
विपक्ष ने आरोप लगाया कि नई टैक्स दरें आम जनता और छोटे कारोबारियों के लिए समस्या खड़ी कर रही हैं। बढ़ी हुई टैक्स दरें व्यापारियों पर दबाव बनाती हैं, जिससे अधिकारी अधिक वसूली का रास्ता खोलते हैं।
भ्रष्टाचार के आरोप
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक टैक्स दरें कर चोरी को बढ़ावा देती हैं, जिससे सरकारी अधिकारियों और भ्रष्ट तंत्र को फायदाहोता है। विपक्ष ने इसे भाजपा की ‘दोहरी राजनीति’ करार दिया।
सरकार का पक्ष
भाजपा का कहना है कि नई टैक्स दरें राजस्व में वृद्धि और कर प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जरूरी हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि नई स्लैब का उद्देश्य विभिन्न वर्गों को राहत देना है।
जनता का असर
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते टैक्स का बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ता है। यह महंगाई बढ़ाने और खर्च कम करने का कारण बन सकता है।
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विशेष संवाददाता -मनोज शुक्ल