लाल कार्ड विवाद: अखिलेश यादव ने प्रशासन पर लगाए पक्षपात के आरोप
Manoj Shukla Tuesday, 19 November 2024 8:54 PM26 Views
“उत्तर प्रदेश उपचुनाव से पहले अखिलेश यादव ने अधिकारियों पर ‘लाल कार्ड’ बांटकर मतदाताओं पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने इसे वोटिंग अधिकारों का उल्लंघन बताया और चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की।”
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में होने वाले 9 सीटों के उपचुनाव से पहले राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अधिकारियों द्वारा मतदाताओं को डराने और प्रभावित करने के लिए ‘लाल कार्ड’ बांटे जा रहे हैं।
चुनाव आयोग तुरंत इस बात का संज्ञान ले कि उप्र में शासन-प्रशासन पक्षपात पूर्ण रवैया अपना रहा है और मतदान को बाधित करने के लिए ‘नोटिस-चेतावनी’ के लाल कार्ड बाँटकर मतदाताओं पर दबाव बना रहा है। ये एक तरह से संविधान द्वारा दिये गये वोटिंग के अधिकार को छीनने का ग़ैर-क़ानूनी कृत्य है।… pic.twitter.com/XR5RqsbCAy
अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक तस्वीर साझा की। इस तस्वीर में एक लाल रंग का कार्ड दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि,
“यह संविधान द्वारा दिए गए वोटिंग अधिकार को छीनने का एक गैरकानूनी कृत्य है। चुनाव आयोग तुरंत इस पर संज्ञान ले और कार्रवाई करे।”
अखिलेश ने आरोप लगाया कि इन कार्डों का इस्तेमाल प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मतदाताओं को डराने और सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए किया जा रहा है।
सपा का रुख और चुनाव आयोग से मांग
सपा ने इस मामले को लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ करार दिया है। पार्टी ने दावा किया कि इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग से मांग की है कि–
लाल कार्ड बांटने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
भाजपा और अन्य दलों ने अखिलेश यादव के आरोपों को खारिज करते हुए इसे “चुनाव से पहले सपा की रणनीति” बताया। भाजपा प्रवक्ता ने कहा,
“अखिलेश यादव को हार का डर सता रहा है, इसलिए वे इस तरह के निराधार आरोप लगा रहे हैं।”
वहीं, बसपा और कांग्रेस ने इस मुद्दे पर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ये मणिपुर नहीं है, ये उप्र के सीसामऊ विधानसभा सभा क्षेत्र के उपचुनाव से आई तस्वीरें हैं। सवाल ये है कि क्या उप्र सरकार की नाकामी की वजह से जनता में अब इतना विश्वास नहीं रह गया है कि वो बेख़ौफ़ वोट डालने बाहर निकल सके, इसीलिए इस (तथाकथित) विश्वास को उपजाने के लिए ये क़वायद की जा… pic.twitter.com/zCZBmxOsc4
भारतीय चुनाव कानून के तहत किसी भी मतदाता को डराने, धमकाने, या उनकी स्वतंत्रता को प्रभावित करने का प्रयास गैरकानूनी है। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो इसमें शामिल अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
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