“सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज शेखर कुमार यादव के विवादित भाषण पर संज्ञान लिया है। सीजेएआर ने इस मामले में न्यायिक नैतिकता के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। जानें इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से।”
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव के विवादित भाषण पर खुद संज्ञान लिया है। यह मामला उस वक्त सामने आया जब जस्टिस यादव ने रविवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की लीगल सेल द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कई विवादित टिप्पणियां की थीं। इन टिप्पणियों पर देशभर में विवाद पैदा हो गया और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गंभीरता से संज्ञान लिया।
इससे पहले, न्यायिक जवाबदेही और सुधार अभियान (सीजेएआर) के संयोजक प्रशांत भूषण ने भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को पत्र लिखकर न्यायमूर्ति शेखर यादव के खिलाफ आंतरिक जांच की मांग की थी। सीजेएआर ने आरोप लगाया कि न्यायमूर्ति यादव ने अपने भाषण में न केवल एक समुदाय के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया, बल्कि न्यायिक नैतिकता और संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों का उल्लंघन भी किया।
पत्र में यह भी कहा गया कि न्यायमूर्ति यादव ने एक समुदाय के बच्चों को दया और अहिंसा के मूल्य सिखाने की बात की थी और इस समुदाय की सहिष्णुता पर सवाल उठाए थे। साथ ही, उन्होंने यह भी दावा किया कि हिंदू परंपराओं में गाय, गीता और गंगा को परिभाषित करने वाली मुख्य बातें हैं, और भारत एक ऐसा देश है जहां हर बच्चा राम होता है।
यह भी पढ़ें :महाकुम्भ 2025: गुजरात में संवाद कार्यक्रम, मंत्रियों ने ऐसा किया आमंत्रित
इसके अलावा, जज यादव ने बहुसंख्यक समुदाय के पक्ष में टिप्पणी करते हुए कहा कि हिंदुस्तान बहुसंख्यकों के अनुसार काम करेगा और कानून उनके हितों के अनुकूल रहेगा। इन टिप्पणियों को लेकर आलोचनाएं बढ़ रही हैं, क्योंकि इससे भारत के संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष और समतावादी मूल्यों को कमजोर करने की आशंका जताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट से रिपोर्ट मांगी है। यह घटनाक्रम न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए जुड़े रहें विश्ववार्ता के साथ। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।