इण्डिया /पाकिस्तान के बंटवारे ने सरहदों को तो बांट दिया लेकिन लोगों की श्रद्धा नहीं बंटी

भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के बीच.. पिछले कुछ दिनों से करतारपुर साहिब गुरुद्वारे की चर्चा हो रही है . ये गुरुद्वारा… वैसे तो है पाकिस्तान में… लेकिन इसके सबसे ज़्यादा श्रद्धालु भारत में हैं . सन 1947 में हुए बंटवारे ने…. सरहदों को तो बांट दिया लेकिन लोगों की श्रद्धा नहीं बंटी. आज भी भारत के सिख समुदाय के लोग करतारपुर साहिब गुरुद्वारे में जाना चाहते हैं . वहां अरदास करना चाहते हैं . लेकिन सरहद का कानून उन्हें इस बात की इजाज़त नहीं देता .इण्डिया /पाकिस्तान के बंटवारे ने सरहदों को तो बांट दिया लेकिन लोगों की श्रद्धा नहीं बंटी

इसका दूसरा पहलू ये भी है कि पाकिस्तान के सियासी लोगों का दिल इतना छोटा है कि वो किसी नेक काम के लिए तैयार नहीं होना चाहते. दूसरी तरफ भारत के कुछ नेता दूरबीन लगाकर इस गुरुद्वारे को देख रहे हैं और इसमें अपने लिए राजनीतिक संभावनाएं तलाश रहे हैं. लेकिन आज हम देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में करते हुए उन्हें साक्षात करतारपुर साहिब के दर्शन करवाएंगे . हमारी टीम ने दूरबीन से इस गुरुद्वारे को देखने के बजाए..खुद वहां जाकर रिपोर्टिंग की है.इण्डिया /पाकिस्तान के बंटवारे ने सरहदों को तो बांट दिया लेकिन लोगों की श्रद्धा नहीं बंटी

सबसे पहले आप एक नक्शे के ज़रिए ये समझिये कि करतारपुर साहिब गुरुद्वारा…भारत के नज़दीक होने बावजूद हमारी पहुंच से दूर कैसे है. ये गुरुद्वारा… पंजाब के गुरदासपुर ज़िले के Border से सिर्फ़ 3 किलोमीटर दूर है . इस Border के पास मौजूद डेरा बाबा नानक से करतारपुर साहिब गुरुद्वारे की झलक दूरबीन से नज़र आती है . इसीलिए बहुत सारे लोग यहां आकर दूर से ही करतारपुर साहिब के दर्शन करके हाथ जोड़ते हैं. ये सिखों के पहले गुरु… गुरुनानक देव जी का घर था . गुरुनानक जी ने करतारपुर में ही अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष बिताए थे . वर्ष 1947 से पहले जब बंटवारा नहीं हुआ था….तब श्रद्धालु बिना किसी रोक टोक के करतारपुर साहिब के दर्शन कर सकते थे . लेकिन बंटवारे के बाद करतारपुर साहिब का गुरुद्वारा पाकिस्तान के हिस्से में चला गया और सिखों के लिए करतारपुर साहिब के दर्शन बहुत दुर्लभ हो गए . इण्डिया /पाकिस्तान के बंटवारे ने सरहदों को तो बांट दिया लेकिन लोगों की श्रद्धा नहीं बंटी

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