लखनऊ। उप्र राज्य राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक ने हैदराबाद की एक कंपनी के 4 निदेशकों के खिलाफ बिना काम कराए सात अरब 76 लाख रुपए डकार जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई है।प्रमुख सचिव नवनीत सहगल के आदेश पर यह एफआईआर दर्ज कराई गई।
घोटाले को पांच साल तक छुपाए रखने के कारण प्राधिकरण की भूमिका संदेह के घेरे में आई है। यह खेल बैंकों से बिना काम किए लोन लेकर किया गया है। इसकी शुरुआत मार्च 2012 से हुई और सारा खेल तबसे लेकर जून 2014 के बीच खेला गया है।
प्राधिकरण के परियोजना निदेशक शिव कुमार अवधिया ने 20 फरवरी को यहां विभूति खंड थाने में एसईडब्ल्यूएलएसवाई हाईवे प्राइवेट लि. कंपनी के चार निदेशकों और 14 बैंकों के स्वतंत्र अभियंता और चार्टर्ड एकाउंटेंटों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
अवधिया का कहना है कि सहारनपुर से दिल्ली के बीच यमुनोत्री हाईवे का चौड़ीकरण होना था। लगभग दो सौ किलोमीटर लंबे इस मार्ग को टू लेन से फोर लेन किया जाना था।
प्रोजेक्ट कास्ट एवं फाइनेंशियल प्लान में धनराशि 2770 करोड़ रुपए थी जबकि प्रोजेक्ट की लागत मात्र 1735 करोड़ थी। इस कार्य का टेंडर एक अगस्त 2011 को हुआ था और यह ठेका एसईडब्ल्यूएलएसवाई हाईवे प्राइवेट लि. कंपनी को मिला था।
टेंडर के अनुसार, कंपनी को काम 30 मार्च, 2012 से 900 दिनों में पूरा करना था, लेकिन कंपनी ने बिना काम कराए सात अरब 76 लाख रुपए विभिन्न बैंकों से लोन के रूप में हड़प लिये। अबतक सिर्फ 13 फीसदी काम ही हो पाया है।
रकम का भुगतान सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कारपोरेशन बैंक, देना बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, पंजाब नेशनल बैंक और भारतीय स्टेट बैंक आदि के माध्यम से किया गया।
प्राधिकरण के परियोजना निदेशक ने इस घोटाले में कंपनी के चारों निदेशक सुकरावा अनिल, अलोरी साईबाबा, पीएम मूर्ति और यलागदा वेंकटेश तथा सभी बैंकों के स्वतंत्र अभियंताओं और चार्टर्ड एकाउंटेंटों के विरुद्ध धारा 406, 419 और 420 के तहत दर्ज कराया है। अवधिया के अनुसार यह रकम विभिन्न तिथियों में अलग-अलग बैंकों से निकाली गई है।
इस मामले में पुलिस का कहना है कि यह बहुत बड़ा आर्थिक घोटाला है और सभी आरोपी हैदराबाद के रहने वाले हैं। रकम का भुगतान भी बैंकों की हैदराबाद की विभिन्न शाखाओं के जरिए हुआ है। इसकी जांच करने में स्थानीय पुलिस सक्षम नहीं है, इसलिए मामले की रिपोर्ट आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को भेज दी गई है।