संसद के बजट सत्र 2026 में आज (12 फरवरी 2026) काफी हलचल मची हुई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राज्यसभा में बजट पर चर्चा का जवाब दे रही हैं, जहां वे विपक्ष के सवालों और आलोचनाओं का मुकाबला कर रही हैं। कल (11 फरवरी) उन्होंने लोकसभा में अपना जवाब दिया था, जिसमें उन्होंने अर्थव्यवस्था की मजबूती, कैपिटल एक्सपेंडिचर (17.1 लाख करोड़, जीडीपी का 4.4%), राज्यों को टैक्स शेयर (41% के अनुसार पूरा ट्रांसफर), स्किलिंग, बायो-फार्मा, कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस को हाइलाइट किया। उन्होंने विपक्ष (खासकर कांग्रेस) पर पलटवार करते हुए कहा कि यूपीए सरकार ने देश के हितों को कमजोर किया था, और राहुल गांधी के “देश बेचने” वाले आरोपों को खारिज किया।
लोकसभा में हंगामा और बहस जारी है। राहुल गांधी ने हाल ही में बजट चर्चा में सरकार पर तीखा हमला बोला, खासकर भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US interim trade deal) को “पूर्ण समर्पण” बताते हुए। उन्होंने दावा किया कि इससे किसानों (मक्का, सोयाबीन जैसे फसलों पर अमेरिकी बड़े फार्मों से प्रतिस्पर्धा), मजदूरों, ऊर्जा सुरक्षा और डेटा अधिकारों को नुकसान होगा। राहुल ने पीएम मोदी पर “चोक” (दबाव में) होने का आरोप लगाया, एप्स्टीन फाइल्स का जिक्र किया, और कहा कि सरकार किसानों-मजदूरों की आवाज नहीं सुन रही।
इसके अलावा, कुछ विपक्षी सांसदों (मुख्य रूप से कांग्रेस) के स्पीकर चैंबर (ओम बिरला के चैंबर) में घुसने का विवाद गहरा गया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि 20-25 कांग्रेस सांसदों ने स्पीकर को गाली दी और पीएम को धमकी दी। स्पीकर ने हंगामे पर नाराजगी जताई और कहा कि सदन को ऐसे नहीं चलाया जा सकता। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया, उनकी सदस्यता समाप्त करने और चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध की मांग की। कुछ शब्दों को एक्सपंज करने की भी बात चल रही है।
विपक्ष ट्रेड डील को “ट्रैप डील” बता रहा है और मजदूर यूनियनों की हड़ताल का समर्थन कर रहा है। कुल मिलाकर, सत्र में सरकार vs विपक्ष का टकराव चरम पर है, जिसमें ट्रेड डील, किसान-मजदूर मुद्दे और बजट आवंटन प्रमुख हैं।
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