(नई दिल्ली ) तारिक रहमान (Tarique Rahman) को बांग्लादेश का नया प्रधानमंत्री बनाया गया है। यह शपथ17 फरवरी 2026 को हुई, जब उन्होंने राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन के सामने शपथ ली।
बीएनपी की भारी जीत: उनकी पार्टी Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनावों में भारी बहुमत हासिल किया। BNP ने 300 में से 200+ सीटें जीतीं (कुछ रिपोर्ट्स में 209/297 का जिक्र), जो 2024 में शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद पहला बड़ा चुनाव था। यह चुनाव 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद हुआ, जिसने हसीना को सत्ता से हटा दिया था।
शपथ ग्रहण: ढाका के संसद भवन के बाहर एक समारोह में शपथ हुई। तारिक रहमान (उम्र 60) पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के पुत्र हैं। वे 17 साल के निर्वासन (लंदन में) के बाद 2025 के अंत में वापस लौटे थे।
कैबिनेट: उन्होंने 25 कैबिनेट मंत्री और 24 राज्य मंत्रियों वाली टीम बनाई है। इसमें 2024 के छात्र आंदोलन के कुछ नेता भी शामिल हैं। एक हिंदू मंत्री भी कैबिनेट में है।
भारत के साथ संबंध: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत बधाई दी और तारिक रहमान को परिवार सहित भारत की आधिकारिक यात्रा का निमंत्रण दिया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला शपथ ग्रहण में शामिल हुए और मोदी का पत्र सौंपा। मोदी ने “गर्मजोशी से स्वागत” का संदेश दिया।
कुछ ठंडक क्यों?: बीएनपी के चुनाव अभियान में “न दिल्ली, न पिंडी, न कोई और देश—बांग्लादेश पहले” जैसे नारे थे, जो भारत और पाकिस्तान दोनों से दूरी का संकेत देते हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि तारिक रहमान की सरकार अधिक स्वतंत्र विदेश नीति अपनाएगी, खासकर भारत के प्रभाव को कम करने की कोशिश में। हालांकि, शुरुआती संकेत सकारात्मक हैं—मोदी का निमंत्रण और बिरला की मौजूदगी से लगता है कि भारत संबंध सुधारना चाहता है। लेकिन बीएनपी का इतिहास और कुछ पुराने मुद्दे (जैसे सीमा, पानी बंटवारा) ठंडक पैदा कर सकते हैं।
यह बांग्लादेश के लिए एक बड़ा बदलाव है—35 साल बाद पहला पुरुष प्रधानमंत्री (पहले खालिदा जिया और शेख हसीना ही थीं)। चुनौतियां बड़ी हैं: अर्थव्यवस्था सुधारना, राजनीतिक स्थिरता, और 2024 के विद्रोह के बाद कानून-व्यवस्था बहाल करना।
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