“निषाद पार्टी ने लखनऊ में ‘सत्ताईस का नारा… निषाद है सहारा’ के साथ होर्डिंग्स लगाकर उपचुनाव में बेईमानी के खिलाफ अपनी ताकत दिखाई। जानें संजय निषाद ने क्या कहा और उनकी चुनावी रणनीति क्या है।“
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में चुनावी बयानों की धूम मची है, जहां निषाद पार्टी ने अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए ‘सत्ताईस का नारा… निषाद है सहारा’ के होर्डिंग्स लगाए हैं। कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने एक शक्तिशाली बयान देते हुए कहा कि “प्रदेश में बेईमानों की फौज” सक्रिय है, जो हमारी सुरक्षा को चुनौती दे रही है।
उन्होंने अपने समर्थकों से कहा, “हमारे पूर्वजों ने इस देश को आजाद कराया और संविधान बनाया। आज हम उसी संविधान की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं। बेईमान लोग हमारी आवाज को दबाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हम मूल्यों की राजनीति में विश्वास रखते हैं। हमारा मूल्य मोदी और अमित शाह को ज्ञात है।”
संजय निषाद ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने समाजवादी पार्टी को सत्ता से दूर रखा है, जिससे उनके समर्थक दुखी हैं। उनका उद्देश्य 2027 के चुनावों में अपनी उपस्थिति को मजबूती से स्थापित करना है।
लखनऊ के प्रमुख स्थलों जैसे यूपी बीजेपी मुख्यालय, मुख्यमंत्री आवास और राजभवन में स्थापित ये होर्डिंग्स केवल चुनावी प्रचार नहीं, बल्कि एक संदेश भी हैं कि निषाद पार्टी अब आगे बढ़ने के लिए तैयार है।
इसी बीच, मैनपुरी में सपा सांसद डिंपल यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। “भाजपा के दीपोत्सवों से लोगों की समस्याएं खत्म नहीं होंगी, अयोध्या में अन्याय जारी है,” उन्होंने कहा।
विश्लेषकों के अनुसार, निषाद पार्टी ने उपचुनाव में बीजेपी से एक भी सीट न मिलने के बाद अपनी नई रणनीति से चुनावी मैदान में उतरने का प्रयास किया है। इस बार वे अपने समर्थकों के साथ एकजुटता दिखाते हुए एक सशक्त विपक्ष के रूप में उभरने की कोशिश कर रहे हैं।
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