“गाजियाबाद सदर विधानसभा सीट पर भाजपा की स्थिति मजबूत है। 2022 के चुनाव में शानदार जीत के बाद भाजपा इस बार भी जीत की हैट्रिक बनाने की ओर अग्रसर है। जातिगत समीकरण और विकास के मुद्दे भाजपा के पक्ष में जा रहे हैं। क्या सपा और बसपा भाजपा के मजबूत उम्मीदवार संजीव शर्मा को चुनौती दे पाएंगे?”
गाजियाबाद। गाजियाबाद सदर विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक केंद्रों में से एक मानी जाती है। यहां 2022 में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज की थी और अब 2024 के चुनाव में भी पार्टी अपनी जीत की हैट्रिक बनाने की ओर बढ़ रही है। इस बार भी जातिगत समीकरण, विकास कार्य और सुरक्षा के मुद्दे भाजपा के पक्ष में नजर आ रहे हैं।
भाजपा ने अपनी पूर्ववर्ती सफलता को बनाए रखने के लिए इस सीट पर अपने पुराने और लोकप्रिय नेता संजीव शर्मा को मैदान में उतारा है। वहीं, सपा और बसपा ने अपनी चुनावी रणनीतियां तैयार की हैं, लेकिन भाजपा की स्थिति इस सीट पर मजबूत दिखाई दे रही है।
जातिगत समीकरण: भाजपा के पक्ष में
गाजियाबाद सदर विधानसभा क्षेत्र में कुल 4.60 लाख मतदाता हैं। इनमें सबसे ज्यादा निर्णायक भूमिका सामान्य वर्ग (32%) और अनुसूचित जाति (25%) के मतदाता निभाते हैं। इसके अलावा ओबीसी (18%), मुस्लिम (17%) और अन्य (8%) मतदाता भी चुनाव परिणाम में अहम भूमिका निभा सकते हैं। भाजपा को सामान्य वर्ग और अनुसूचित जाति के मतदाताओं का पारंपरिक समर्थन मिलता रहा है। इन जातियों का वोट बैंक भाजपा के पक्ष में जा रहा है, जो पार्टी के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
भाजपा ने इस बार चुनावी मैदान में अपने पुराने और लोकप्रिय नेता संजीव शर्मा को उतारा है, जिनकी पहचान एक मजबूत और जनता के बीच लोकप्रिय नेता के तौर पर रही है। इसके अलावा भाजपा ने इस बार विकास और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर फोकस किया है, जो इस चुनाव में जीत का प्रमुख कारण साबित हो सकते हैं।
पिछले चुनाव का प्रदर्शन
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने गाजियाबाद सदर सीट पर शानदार प्रदर्शन करते हुए 61.37% वोट हासिल किए थे, जबकि सपा को महज 18.25% और बसपा को 12.5% वोट ही मिले थे। भाजपा की जीत में उसकी विकास की योजनाएं, सुरक्षा की स्थिति, और भाजपा की लोकप्रिय नीतियों का अहम हाथ था। वहीं, सपा और बसपा की स्थिति यहां कमजोर नजर आई थी, और दोनों दलों के वोट शेयर में कोई खास वृद्धि नहीं हो सकी थी।
2022 के वोट प्रतिशत
भाजपा: 61.37%सपा: 18.25% बसपा: 12.5%
सपा और कांग्रेस के गठबंधन से कुल वोट प्रतिशत 23.06% तक पहुंच सकता था, लेकिन यह अब भी भाजपा के वोट शेयर से 38.31% कम है।
प्रत्याशी और उनकी स्थिति
संजीव शर्मा (भा.ज.पा.)
भाजपा के पुराने और मजबूत नेता संजीव शर्मा को इस बार भी मैदान में उतारा गया है। वे दो बार गाजियाबाद महानगर अध्यक्ष रह चुके हैं और उनकी छवि एक जनता के बीच लोकप्रिय नेता के रूप में है। उनकी नेतृत्व क्षमता और भाजपा की बुलडोजर नीति से उनका समर्थन और भी बढ़ा है।
सिंह राज जाटव (सपा)
सपा ने इस बार सिंह राज जाटव को अपना उम्मीदवार बनाया है। वे दलित समुदाय से आते हैं और इस समुदाय के वोटों को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, सपा के लिए इस बार यहां भाजपा से मुकाबला करना चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि भाजपा की पकड़ पहले से मजबूत है।
परमानंद गर्ग (बसपा)
बसपा ने परमानंद गर्ग को उम्मीदवार बनाया है। वे अपनी पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक पर भरोसा कर रहे हैं, लेकिन इस बार बसपा की पकड़ कमजोर नजर आ रही है। पिछले चुनावों में बसपा का प्रदर्शन गाजियाबाद सदर सीट पर अच्छा नहीं रहा था, और इस बार भी पार्टी के लिए कोई खास उम्मीद नजर नहीं आती।
क्या कहते हैं वोटर?
गाजियाबाद सदर सीट पर स्थानीय लोगों से बातचीत में भाजपा के प्रति समर्थन साफ नजर आया। एक बैग के व्यवसायी प्रशांत गुप्ता ने कहा, “यहां भाजपा ने बहुत विकास कार्य किए हैं। महंगाई तो हर जगह है, लेकिन सुरक्षा सबसे अहम है, और इस मामले में भाजपा ने अच्छा काम किया है।”
वहीं, एक अन्य मतदाता नें कहा, “भाजपा ने इस इलाके में जो सड़कें, स्कूल, और अस्पताल बनवाए हैं, उनका असर साफ नजर आ रहा है। हमें भाजपा के शासन में हर दिशा में विकास दिख रहा है।”
पोलिटिकल एक्सपर्ट के अनुसार –
“गाजियाबाद सदर सीट भाजपा की पारंपरिक सीट है। संजीव शर्मा को जनता जानती है और वह लोकप्रिय नेता हैं। सपा और बसपा यहां चुनौती दे रहे हैं, लेकिन उनकी पकड़ सीमित है।”
“विकास और सुरक्षा जैसे मुद्दे भाजपा के पक्ष में जाएंगे, और यही कारण है कि भाजपा इस सीट पर जीत की हैट्रिक बनाने की ओर बढ़ रही है।”
मुख्य चुनावी मुद्दे
विकास कार्य
भाजपा के पक्ष में विकास और सुरक्षा सबसे बड़े मुद्दे बने हुए हैं। गाजियाबाद में सड़कें, पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा के क्षेत्र में भाजपा ने अच्छा काम किया है।
महंगाई और बेरोजगारी
विपक्ष इन मुद्दों पर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भाजपा इन मुद्दों को अपनी नीतियों से नियंत्रित करने का दावा कर रही है।
जातिगत राजनीति
सपा और बसपा अनुसूचित जाति और मुस्लिम वोटरों को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही हैं, लेकिन भाजपा का पारंपरिक समर्थन मजबूत है, जो पार्टी के पक्ष में जाता दिख रहा है।
भाजपा की रणनीति
भा.ज.पा. ने इस सीट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत बड़े नेताओं की जनसभाएं करवाई हैं। पार्टी का फोकस कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर रहा है। भाजपा की पूरी कोशिश इस बात पर है कि गाजियाबाद के मतदाताओं को यह यकीन दिलाया जाए कि भाजपा ही उनके विकास और सुरक्षा का सबसे बेहतर विकल्प है।
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विशेष संवाददाता: मनोज शुक्ल