“संभल डीएम ने ओवैसी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बुलडोजर की कार्रवाई घरों पर नहीं, बल्कि अवैध अतिक्रमण पर हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरा पालन किया जा रहा है।”
संभल। संभल में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद बढ़ रहा है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि बुलडोजर का इस्तेमाल सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ किया जा रहा है। ओवैसी ने कहा कि प्रभावित लोगों को 15 दिन का नोटिस और अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।
डीएम का स्पष्टीकरण
संभल के जिलाधिकारी (डीएम) डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने ओवैसी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कार्रवाई संभल में नहीं, बल्कि चंदौसी में हो रही है। डीएम ने स्पष्ट किया कि बुलडोजर का इस्तेमाल नाले-नालियों पर किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए किया जा रहा है, न कि घरों को तोड़ने के लिए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन
डीएम ने कहा कि यह कार्रवाई 22 दिन पहले शुरू हुई थी और पूरी सहमति के साथ की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए विस्थापित लोगों के लिए दूसरी जगह पर व्यवस्था की गई है।
शाही जामा मस्जिद विवाद
19 नवंबर को चंदौसी कोर्ट में हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि संभल की शाही जामा मस्जिद पहले हरिहर मंदिर थी। इस विवाद के बाद मस्जिद का सर्वे कराया गया, जिसके दौरान तनाव बढ़ गया। हजारों की भीड़ ने पथराव, आगजनी और फायरिंग की, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी।
ओवैसी का ट्वीट
ओवैसी ने “X” पर ट्वीट कर कहा, “संभल में जो बुलडोजर एक्शन हुआ वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है। प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए।” डीएम ने इन आरोपों को खारिज कर सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन्स का पालन करने की बात कही।
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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल