Thursday , February 20 2025

उत्तराखण्ड

कॉर्बेट पार्क ही नहीं, अब उत्तराखंड के हर फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में रुकना होगा महंगा

उत्तराखंड में वन विश्राम भवनों (फॉरेस्ट रेस्ट हाउस) में ठहरना अब महंगा होगा। इसकी दरों में दो से ढाई गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है। कार्बेट टाइगर रिजर्व में की गई ऐसी पहल के बाद प्रदेश के सभी वन विश्राम भवनों के मामले में भी सरकार ने ऐसा करने की ठानी है। वन मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत ने प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) को इसका प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि फॉरेस्ट रेस्ट हाउसों का ठीक से रखरखाव नहीं हो पा रहा, ऐसे में नई दरों का निर्धारण करना जरूरी है। राज्यभर में वन विश्राम भवनों की संख्या 350 के लगभग है और इनमें एक रात्रि ठहरने का शुल्क भारतीयों के लिए 250 से 5000 रुपये और विदेशियों के लिए पांच सौ से 12 हजार रुपये तक है। पिछले कई सालों से इनकी दरों में इजाफा नहीं हुआ है, जबकि दरों में वृद्धि की बात लंबे अर्से से चल रही है। इस बीच बीती सात मई को हुई टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन फॉर कार्बेट टाइगर रिजर्व की शासी निकाय की बैठक में इस रिजर्व के अंतर्गत आने वाले वन विश्राम भवनों के लिए दरों में दो से ढाई गुना वृद्धि का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस बारे में शासनादेश होना बाकी है। माना जा रहा कि कार्बेट में इस साल 15 नवंबर को पार्क खुलने के बाद वहां नई दरें लागू हो जाएंगी। उत्तराखंड में पौधरोपण पर करोड़ों खर्च, नतीजा फिर भी सिफर यह भी पढ़ें अब इसी तर्ज पर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में वन विश्राम भवनों के शुल्क की दरों में बढ़ोतरी का निश्चय किया गया है। वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत ने कहा कि विभाग के तमाम रेस्ट हाउस ऐतिहासिक हैं। इनमें कई आजादी से पहले के बने हैं। ठहरने को शुल्क की दरें कम होने के कारण इनका रखरखाव ठीक से नहीं हो पा रहा है। ऐसे में शुल्क की दरों में बढ़ोतरी समय की मांग है। डॉ. रावत ने कहा कि शुल्क की नई दरों के संबंध में पीसीसीएफ जय राज को प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। इसमें इस बात का ख्याल रखने को कहा गया है कि स्कूली बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को कुछ छूट भी दी जाए। उन्होंने कहा कि शुल्क की दरें बढ़ने से होने वाली आय वन विश्राम भवनों के रखरखाव पर खर्च करने के साथ ही वहां अन्य सुविधाएं जुटाने पर खर्च की जाएगी।

उत्तराखंड में वन विश्राम भवनों (फॉरेस्ट रेस्ट हाउस) में ठहरना अब महंगा होगा। इसकी दरों में दो से ढाई गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है। कार्बेट टाइगर रिजर्व में की गई ऐसी पहल के बाद प्रदेश के सभी वन विश्राम भवनों के मामले में भी सरकार ने ऐसा करने की …

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उत्तराखंड के बिजली विहीन सरकारी स्कूल अब इस तरह होंगे रोशन, जानिए

प्रदेश के बिजली विहीन सरकारी स्कूल अब सौर ऊर्जा से रोशन होंगे। इतना ही नहीं भारी-भरकम बिलों का भुगतान नहीं होने से विद्यालयों में अंधेरा भी नहीं पसरेगा। विद्यालयों से व्यावसायिक दरों के बजाय घरेलू दरों पर बिजली के बिल लिए जाएंगे। इसे लेकर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। राज्य में अभी भी तकरीबन तीन हजार स्कूलों में बिजली नहीं है। इसके अलावा विद्यालयों से वर्तमान में व्यावसायिक दर से बिजली बिल की वसूली की जा रही है। बिलों के भुगतान की राशि न होने के कारण बड़ी संख्या में ऐसे विद्यालय भी हैं, जिनके कनेक्शन कटे हुए हैं। ऐसे में विद्यालयों का अंधेरा दूर करने के लिए शिक्षा महकमा अब नई योजना पर काम कर रहा है। गुरुवार को ननूरखेड़ा स्थित राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (सीमैट) में आयोजित समीक्षा बैठक में महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा कैप्टन आलोक शेखर तिवारी ने इसे लेकर सभी जनपदों से रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने बताया कि समस्त तोक प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना से आच्छादित किए जा रहे हैं। इसके बावजूद जो स्कूल छूट जाएंगे वहां सौर ऊर्जा से विद्युत व्यवस्था की जाएगी। जानिए लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ने क्या कहा छात्र-छात्राओं से यह भी पढ़ें उरेडा ने प्राथमिक, माध्यमिक विद्यालय भवनों और शिक्षा विभाग के कार्यालयों की छत पर एक केवी से दस केवी तक सोलर पैनल लगाने का प्रस्ताव भी महकमे को दिया है। जहां बिल बकाया होने के कारण कनेक्शन कटा हुआ है, उसका भी ब्योरा जुटाया जा रहा है। यहां जल्द विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। विद्युत टैरिफ पर निर्णय लेने का अधिकार क्योंकि उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग को है। महकमे की ओर से प्रस्ताव तैयार कर आयोग को भेजा जाएगा ताकि स्कूलों को घरेलू रेट पर बिजली मिल सके।

प्रदेश के बिजली विहीन सरकारी स्कूल अब सौर ऊर्जा से रोशन होंगे। इतना ही नहीं भारी-भरकम बिलों का भुगतान नहीं होने से विद्यालयों में अंधेरा भी नहीं पसरेगा। विद्यालयों से व्यावसायिक दरों के बजाय घरेलू दरों पर बिजली के बिल लिए जाएंगे। इसे लेकर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।  …

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प्रशांत महासागर की ऊंची लहरों से नहीं डरी वर्तिका, तारिणी पर था पूरा भरोसा

हौसले हैं बुलंद हर मुश्किल को आसां बना देंगे, छोटी टहनियों की क्या बिसात, हम बरगद को हिला देंगे। वो और हैं जो बैठ जाते हैं थक कर मंजिल से पहले, हम बुलंद हौसलों के दम पर आसमां को झुका देंगे। भारतीय नौसेना के सबसे चुनौतीपूर्ण अभियान 'नाविका सागर परिक्रमा' को सफलता पूर्वक अंजाम देने वाली नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ने कुछ इसी अंदाज में अपने विजय अभियान को बयां किया। उन्होंने बताया कि नाविका सागर परिक्रमा एक चुनौतीपूर्ण अभियान था, चूंकि आज तक किसी ने भी इस तरह का अभियान पाल नौका के जरिये पूरा नहीं किया था और वह भी सिर्फ महिलाओं के क्रू ने। वर्तिका जोशी ने बताया कि 254 दिन तक चले इस अभियान में कई विपरीत परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। कई बार तो समुद्र की लहरों ने ऐसी चुनौती दी कि मन भीतर तक कांप गया। मगर, अभियान दल के पक्के इरादे और दृढ़ निश्चय ने सभी चुनौतियों को आसान बना दिया। उन्होंने बताया कि 10 दिसबंर को उन्होंने गोवा से इस अभियान की शुरुआत की थी। मगर, सबसे अधिक चुनौती प्रशांत महासागर ने दी। जब वह धरती से करीब पांच हजार किलोमीटर दूर केथोन में थे तभी एक समुद्री तूफान आ गया। केथोन को समुद्र का माउंट एवरेस्ट कहा जाता है। इस तूफान को वह पांच दिनों से समझने की कोशिश कर रहे थे। मगर आखिर एक रात को समुद्र में भयंकर तूफान आ गया। समुद्र की लहरें नौ से दस मीटर तक ऊंची उठने लगी। ऐसा लगा मानो कोई लहर इस छोटी सी नौका को अपने आगोश में ले लेगी। मगर, हमने हार नहीं मानी और समुद्र की लहरों से जूझते रहे और आखिर हम उस तूफान से निकलने में कामयाब रहे। जानिए लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ने क्या कहा छात्र-छात्राओं से यह भी पढ़ें उन्होंने बताया कि उस समय उनकी टीम ने लगातार 20 से 25 घंटे तक बिना सोये इस तूफान का मुकाबला किया। उन्होंने बताया कि समुद्र हमेशा डरावना ही नहीं होता, हमारे समुद्र में कई अच्छे अनुभव भी रहे। अभियान के आखिरी चरण में तो एक समय ऐसा भी आया जब हमें समुद्र में हवा भी नहीं मिली, चूंकि यह नौका हवा से ही चलती है, इसलिए हमें कई दिन तक एक ही जगह पर रुकना भी पड़ा। मां के शब्द आते रहे याद अब स्कूलों में सुरक्षित रहेंगे बच्चे, गुड टच-बेड टच पर होगा 'तीसरी' आंख का पहरा यह भी पढ़ें लेफ्टिनेंट वर्तिका जोशी ने बताया कि जब वह अभियान पर जाने वाली थी तो ठीक पांच दिन पहले वह मां और पिता से मिलने ऋषिकेश आई थी। मगर, पता चला कि मां जॉलीग्रांट हास्पिटल में भर्ती है और वह गंभीर रूप से बीमार है। वह जब मिलने गई तो मां ने कहा कि वर्तिका तुम पीछे मुड़कर मत देखना और लक्ष्य पूरा करके ही लौटना। वर्तिका ने बताया कि 254 दिन के इस सफर में उन्हें कई बार मां की याद आई मगर, आखिर मां के वही शब्द जेहन में आ जाते और फिर सबकुछ सामान्य हो जाता। तारिणी पर था पूरा भरोसा वर्तिका जोशी ने बताया कि इस अभियान को लेकर उन्हें स्वयं तथा टीम के अलावा तारिणी नौका पर भी पूरा भरोसा था। यही वजह रही कि कई बार जटिल खराबी आने के बाद भी तारिणी ने उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी में नहीं डाला। वर्तिका ने बताया कि तारिणी को फरवरी 2017 में नौसेना में कमीशन किया गया था। जब तारिणी पर पहली लकड़ी लगाई तब से वह तारिणी को करीब से देख रही थी। इस बोट से मेरा करीबी रिश्ता बन गया था, इसलिए तारिणी की कार्यकुशलता पर उन्हें पूरा भरोसा था। वर्तिका ने बताया कि किस तरह तारिणी में सवार वह छह महिला अधिकारी ही सब कुछ थी। उन्हें स्वयं खाना बनाना होता था, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, सफाई कर्मी सहित सभी भूमिकाएं स्वयं निभानी होती थी।

हौसले हैं बुलंद हर मुश्किल को आसां बना देंगे, छोटी टहनियों की क्या बिसात, हम बरगद को हिला देंगे। वो और हैं जो बैठ जाते हैं थक कर मंजिल से पहले, हम बुलंद हौसलों के दम पर आसमां को झुका देंगे। भारतीय नौसेना के सबसे चुनौतीपूर्ण अभियान ‘नाविका सागर परिक्रमा’ …

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम की रिहर्सल की

देहरादून, [जेएनएन]: मंगलवार को एफआरआई में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम की रिहर्सल की गई। योग दिवस पर प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार ही सुबह 7 बजे से 7:45 बजे तक योग साधकों द्वारा सामान्य योग प्रोटोकॉल का अभ्यास किया गया। 45 मिनट तक चले योगाभ्यास में सैंकड़ों साधकों ने ग्रीवाचालन, स्कन्ध संचालन, कटि चालन, घुटना संचालन, ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्धचक्रासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, वज्रासन, अर्ध उष्ट्रासन, उष्ट्रासन, शशकासन, उत्तानमंडूकासन, वक्रासन, मकरासन, भुजंगासन, शलभासन, सेतुबंधासन, उत्तानपाद आसन, अर्धहलासन, पवनमुक्तासन, शवासन, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, शीतली प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम व ध्यान का अभ्यास किया। रिहर्सल में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की सभी तैयारियों को परखा गया। इस अवसर पर आयुक्त गढ़वाल दिलीप जावलकर, जिलाधिकारी एसए मुरूगेशन व पुलिस प्रशासन के अन्य आला अधिकारी उपस्थित थे।

देहरादून, [जेएनएन]: मंगलवार को एफआरआई में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम की रिहर्सल की गई। योग दिवस पर प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार ही सुबह 7 बजे से 7:45 बजे तक योग साधकों द्वारा सामान्य योग प्रोटोकॉल का अभ्यास किया गया। 45 मिनट तक चले योगाभ्यास में सैंकड़ों …

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जो अफसर आराम के लिए नैनीताल आएं हैैं वेे वापस जाएं: डॉ. इंदिरा हृदयेश

नेता प्रतिपक्ष डॉ इंदिरा हृदयेश ने प्रशासन की लापरवाही से नैनीताल में पर्यटन प्रभावित होने का आरोप लगाया। कहा कि अधिकारियों ने नैनीताल को अपनी आरामगाह बना दिया है। जो अफसर आराम के लिए नैनीताल आएं हैं वह काम नहीं कर सकते तो तत्काल नैनीताल छोड़ दें। साथ ही हल्द्वानी में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थित पर आंदोलन की चेतावनी दी। रविवार को एक होटल में आयोजित प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नैनीताल जिले में भारी पुलिस फोर्स है, लेकिन फिर भी आपराधिक घटनाओं का खुलासा नहीं किया जा रहा। अब कांग्रेस पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ जनता को साथ लेकर सड़क पर उतरेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने सितारगंज चीनी मिल को बंद कर दिया है। सर्वाधिक लाभ में चलने वाली बाजपुर चीनी मिल भी बंदी के कगार पर है। वित्तीय प्रबंधन में सरकार पूरी तरह विफल है।

नेता प्रतिपक्ष डॉ इंदिरा हृदयेश ने प्रशासन की लापरवाही से नैनीताल में पर्यटन प्रभावित होने का आरोप लगाया। कहा कि अधिकारियों ने नैनीताल को अपनी आरामगाह बना दिया है। जो अफसर आराम के लिए नैनीताल आएं हैं वह काम नहीं कर सकते तो तत्काल नैनीताल छोड़ दें। साथ ही हल्द्वानी …

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केदारनाथ आपदा के पांच सालः बाबा के धाम पर सियासत के दांवपेच

जून 2013 की केदारघाटी की प्राकृतिक आपदा यूं तो इतिहास की भयावह दुर्घटनाओं में शुमार है, लेकिन विडंबना यह है कि हजारों जिंदगी लीलने वाले इस हादसे पर पिछले पांच सालों से जारी सियासत अब भी नहीं थम पाई है। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को उत्तराखंड की उस …

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बेटी की मासूम सूरत देख मां ने की हिम्मत, कुकर्मी को सजा दिलाकर लिया दम

कभी-कभी किसी परिवार का करीबी या रिश्तेदार उसे ऐसी स्थिति में लाकर खड़ा कर देता है कि न उगलते बनता है और न थूकते। अपनी परेशानी किसी दूसरे से साझा करने में भी तमाम तरह की हिचक बनी रहती है। खासकर, बाल यौन शोषण जैसे मामलों में खुद को संभालना …

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उत्तरकाशी में भूकंप के दो झटकों से दहशत में लोग

सुबह उत्तरकाशी जिले की गंगा और यमुनाघाटी में भूकंप के झटके महसूस होने से लोग दहशत में आ गए। आनन फानन लोग घरों से बाहर निकल गए। कहीं किसी नुकसान की सूचना नहीं है।  उत्तराखंड भूकंप के दृष्टि से जोन आठ में है। यहां पहले भी बड़े भूकंप आ चुके …

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उत्तराखंड: धस्माना ने साधा सरकार पर निशाना, अधिकारियों का घेराव करेगी कांग्रेस

प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने चेतावनी दी कि तीन दिन के अंदर विभागों ने सुध नहीं ली तो संबंधित विभागों का घेराव किया जाएगा। अगर फिर भी नहीं चेते तो प्रभारी मंत्री का घेराव किया करेंगे। कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकार …

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अभी-अभी: मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने धर्मगुरुओं से संपर्क कर मांगा समर्थन…

मिशन-2019 के लिए भाजपा ने कवायद शुरू कर दी है। केंद्र की भाजपानीत सरकार के चार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देशव्यापी अभियान ‘संपर्क फॉर समर्थन’ के तहत मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून में विभिन्न धर्म गुरुओं से मुलाकात कर केंद्र सरकार की उपलब्धियों और राज्य सरकार की …

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