“योगी सरकार ने बीमारू से ‘स्वस्थ प्रदेश’ की यात्रा में ऐतिहासिक कदम उठाए। 352 सीएचसी एफआरयू सेवाओं से लैस, 72 स्वास्थ्य इकाइयां सौर ऊर्जा से संचालित, और 800 से अधिक इकाइयों को एनक्यूएएस प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ।”
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के पिछले साढ़े सात वर्षों के कार्यकाल में राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं ने नया आयाम छुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में ऐतिहासिक सुधार किए गए हैं।
352 सीएचसी को एफआरयू सुविधा, सौर ऊर्जा से रोशन स्वास्थ्य इकाइयां
प्रदेश में 352 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) सेवाओं से लैस किया गया है। साथ ही, 72 स्वास्थ्य इकाइयों को पहली बार सौर ऊर्जा से संचालित किया गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ऊर्जा की बचत सुनिश्चित हुई।
स्वास्थ्य सेवाओं का अभूतपूर्व विस्तार
- पिछले एक वर्ष में 10,000 से अधिक स्वास्थ्य उपकेंद्रों को बिजली की सुविधा से जोड़ा गया।
- सभी जिलों में डायलिसिस और सीटी स्कैन की सेवाएं शुरू की गईं, जिससे मरीजों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाएं उपलब्ध हुईं।
- प्रदेश में 800 से अधिक स्वास्थ्य इकाइयों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) प्रमाणपत्र मिला।
4,892 करोड़ की परियोजनाओं का क्रियान्वयन
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत 4,892 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम हो रहा है। इनमें 515 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट, 75 इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब और 74 क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक का निर्माण शामिल है।
राज्य की पहचान बनी स्वास्थ्य सेवाओं में मॉडल
योगी सरकार के प्रयासों से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है, बल्कि राज्य ने देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल पेश किया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की ऑन-कॉल सेवाएं, सस्ती इलाज सुविधाएं, और हाईटेक स्वास्थ्य इकाइयों ने राज्य को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।
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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल