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सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क

सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के खिलाफ एफआईआर रद्द नहीं होगी: हाईकोर्ट का आदेश, गिरफ्तारी पर रोक

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 24 नवंबर को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मामले में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क पर दर्ज एफआईआर को हाईकोर्ट ने रद्द करने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने शुक्रवार को अपना निर्णय सुनाया, जिसमें बर्क की गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लगा दी, लेकिन हिंसा की जांच जारी रखने का आदेश दिया।

संभल में 24 नवंबर को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें पुलिस ने सांसद बर्क का नाम एफआईआर में शामिल किया था। बर्क पर आरोप था कि उन्होंने भड़काऊ भाषण देकर हिंसा को बढ़ावा दिया। इसके बाद, बर्क ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एफआईआर को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि बर्क की गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाती है, क्योंकि आरोपित धाराओं में 7 साल से कम की सजा वाली धाराएं शामिल हैं। हालांकि, कोर्ट ने एफआईआर को रद्द करने की बर्क की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि पुलिस को जांच में पूरा सहयोग देना होगा।

संभल में 19 नवंबर को सिविल कोर्ट के आदेश पर एक टीम जामा मस्जिद का सर्वे करने पहुंची थी। कड़ी सुरक्षा के बीच इस सर्वे की शुरुआत हुई थी, लेकिन जैसे ही जुमे की नमाज के बाद सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने भीड़ को भड़काने के लिए भाषण दिया, स्थिति बिगड़ गई। बर्क ने भड़काऊ और आपत्तिजनक नारे लगाए, जिससे हिंसा भड़क उठी। सांसद बर्क के साथ-साथ स्थानीय सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल का भी नाम एफआईआर में शामिल किया गया।

इसी दौरान, 700-800 लोगों की भीड़ ने पुलिस पर पथराव और गोलीबारी शुरू कर दी। एक उपद्रवी ने सीओ संभल को गोली मार दी, जो उनके पैर में लगी। पुलिस ने इस मामले में बर्क, सुहैल इकबाल और अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की।

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि यह घटना एक पूर्व नियोजित साजिश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे देश में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है और देश की आज़ादी के बाद ऐसी स्थिति कभी नहीं आई थी। बर्क ने यह भी कहा कि जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान प्रशासन ने जानबूझकर मुसलमानों को परेशान किया।

सांसद बर्क के खिलाफ प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 19 दिसंबर को बिजली विभाग ने उनके खिलाफ बिजली चोरी की एफआईआर दर्ज की थी और उन पर 1.91 करोड़ का जुर्माना भी लगाया। इसके अलावा, 20 दिसंबर को उनके घर की सीढ़ियां तोड़ने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की गई थी, क्योंकि नगर पालिका का दावा था कि सीढ़ियां अवैध रूप से सड़क की जमीन पर बनी थीं।

  • 5 दिसंबर को बर्क को बिना नक्शा पास कराए निर्माण कार्य शुरू करने पर नोटिस भेजा गया था।
  • 13 दिसंबर को दूसरी बार नोटिस भेजते हुए निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए गए थे, और जुर्माना भी लगाने की चेतावनी दी थी।
  • 21 दिसंबर को तीसरी बार नोटिस भेजकर बर्क से 7 दिन के अंदर जवाब मांगा गया था, वरना कड़ी कार्रवाई की बात की गई थी।
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