“लखनऊ में विश्व शौचालय दिवस के अवसर पर शहरी स्वच्छता और जल प्रबंधन पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन। केंद्रीय और राज्य मंत्रियों ने दी स्वच्छता को बढ़ावा देने की पहल।”
लखनऊ: विश्व शौचालय दिवस (19 नवंबर) के अवसर पर उत्तर प्रदेश के लखनऊ में शहरी स्वच्छता और जल प्रबंधन पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्घाटन केंद्रीय शहरी विकास राज्यमंत्री तोखन साहू, उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा और अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस मौके पर अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी और प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात ने भी भाग लिया।
कार्यशाला में मुख्य रूप से स्वच्छता अभियान, सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों की देखभाल, जल पुनःप्रबंधन, ओडीएफ प्लस-प्लस क्षेत्रों की स्थापना, और सफाई कर्मियों के लिए सुरक्षा व स्वास्थ्य उपायों पर चर्चा की गई। केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुए स्वच्छ भारत मिशन की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और बताया कि आज देश के 97% शहरी वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण की सुविधा उपलब्ध है।
कार्यशाला के मुख्य बिंदु:
टॉयलेट 2.0 पहल:
शौचालयों की स्वच्छता और सुरक्षा की निगरानी के लिए डिजिटल उपकरणों और टिकाऊ मॉडल्स का प्रदर्शन।
यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट:
छोटे और मध्यम शहरों में प्रयुक्त जल प्रबंधन के लिए नवीन दृष्टिकोण अपनाने की योजना।
मेनहोल से मशीन होल:
सफाई कर्मियों के लिए सुरक्षा किट, प्रशिक्षण मॉड्यूल और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर।
कार्यशाला में दो महत्वपूर्ण एमओयू पर भी हस्ताक्षर हुए। इनमें एक सामुदायिक शौचालयों के संचालन के लिए एचयूएल के साथ और दूसरा सुलभ इंटरनेशनल के साथ भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में शौचालयों के निर्माण के लिए किया गया।
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विशिष्ट वक्तव्य:
नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि प्रदेश में सभी नगर निकाय खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित हो चुके हैं। 129 निकायों ने ओडीएफ प्लस-प्लस का दर्जा प्राप्त कर लिया है। उन्होंने स्वच्छता कर्मियों के उत्थान और उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की।
अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने लखनऊ की स्वच्छता व्यवस्था की प्रशंसा की और कहा कि भारत और अमेरिका दोनों ही देशों के स्वच्छता उद्देश्यों में समानता है।
प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि 2014 से 2019 के बीच प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में 9 लाख से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया। अब इनकी देखभाल और रखरखाव के लिए डीसीसीसी सिस्टम लागू किया जा रहा है।