“महाकुम्भ 2025 के दौरान प्रयागराज में अशोक स्तंभ की रेप्लिका प्रदर्शित की जाएगी। श्रद्धालु इसे स्मृति चिह्न के रूप में ले जा सकेंगे, और सम्राट समुद्रगुप्त की विजय गाथाओं से भी परिचित होंगे।”
प्रयागराज: महाकुम्भ 2025 का आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद खास होगा। इस बार महाकुम्भ में सम्राट अशोक के ऐतिहासिक स्तंभ की रेप्लिका प्रदर्शित की जाएगी, जो श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्मृति चिह्न के रूप में उपलब्ध होगी। इलाहाबाद संग्रहालय ने इस महान आयोजन को और भी खास बनाने के लिए सम्राट अशोक के स्तंभ की छोटी प्रतिकृति तैयार करने का फैसला लिया है।
अशोक स्तंभ और समुद्रगुप्त की गाथा
सम्राट अशोक का स्तंभ, जो प्रयागराज किले में स्थापित है, भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण कक्षों में से एक है। इस स्तंभ पर अंकित प्रयाग प्रशस्ति में सम्राट समुद्रगुप्त की विजय गाथाओं का उल्लेख है। सम्राट समुद्रगुप्त, जिन्हें अखंड भारत के निर्माता के रूप में जाना जाता है, ने 100 युद्ध जीतकर भारत को एकीकृत किया। यह स्तंभ उस महान सम्राट की शौर्य गाथा का प्रतीक है।
स्मृति चिह्न के रूप में उपलब्ध होगी रेप्लिका
महाकुम्भ के दौरान इलाहाबाद संग्रहालय में आने वाले श्रद्धालुओं को अशोक स्तंभ की रेप्लिका उपलब्ध कराई जाएगी। यह प्रतिकृति न केवल ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती है, बल्कि श्रद्धालु इसे अपने साथ ले जाकर इसकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को महसूस कर सकेंगे।
सम्राट अशोक और समुद्रगुप्त की ऐतिहासिक विरासत
सम्राट अशोक का स्तंभ प्रयागराज में सम्राट समुद्रगुप्त के कृतित्व का भी गवाह है। इस स्तंभ में सम्राट अशोक की पत्नी कारुवाकी द्वारा बौद्धों को आम के बाग दान करने का भी उल्लेख मिलता है। इसके अतिरिक्त, समुद्रगुप्त के अभिलेखों में उनकी विजय गाथाओं का अद्भुत विवरण है, जो चम्पू शैली में संस्कृत भाषा में लिखा गया है।
महाकुम्भ 2025 को विशेष बनाने की तैयारी
योगी सरकार के निर्देश पर महाकुम्भ 2025 को एक अलौकिक और अविस्मरणीय आयोजन बनाने के लिए सभी तैयारियाँ जोरों पर हैं। इलाहाबाद संग्रहालय इस आयोजन को ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाते हुए श्रद्धालुओं को एक अद्वितीय अनुभव देने की दिशा में काम कर रहा है।
यह महाकुम्भ का आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होगा।