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9 दिन बाद मिला लापता युवक का कंकाल

1993 में हुए हैंड ग्रेनेड हमले का आरोपी 30 साल बाद क्यों पकड़ा गया?

बानी के खिलाफ देवबंद पुलिस ने 1993 में मामला दर्ज किया था, लेकिन वह जमानत मिलने के बाद फरार हो गया था और तब से उसकी तलाश जारी थी। एटीएस ने पिछले तीन दशकों में कई बार उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह अलग-अलग स्थानों पर अपनी पहचान बदलकर सुरक्षा बलों से बचता रहा। अब जाकर उसकी गिरफ्तारी संभव हो पाई है।

गिरफ्तारी के बाद, बानी को देवबंद थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया है। एटीएस ने उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम भी प्राप्त किया, जिसे सहारनपुर पुलिस ने पहले घोषित किया था। एटीएस और देवबंद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इस आतंकवादी को श्रीनगर से पकड़ा गया।

सहारनपुर के एसपी देहात सागर जैन ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि बानी के खिलाफ कोर्ट ने स्थायी वारंट जारी किए थे, और गिरफ्तारी के दौरान कोई रुकावट नहीं आई। उन्होंने कहा कि यह गिरफ्तारी स्थानीय पुलिस और एटीएस की कड़ी मेहनत और समर्पण का नतीजा है, जो आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

बानी 1993 में देवबंद में हुए विस्फोट के समय एक आतंकवादी संगठन से जुड़ा हुआ था। उसने पुलिसकर्मियों पर हैंड ग्रेनेड फेंका था, जिससे कई लोग घायल हो गए थे। जमानत मिलने के बाद बानी फरार हो गया और तब से एटीएस व स्थानीय पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी। इसके बाद, बानी ने अपनी पहचान बदलकर और नाम बदलकर कई वर्षों तक विभिन्न स्थानों पर रहकर सुरक्षा बलों से बचने की कोशिश की।

गिरफ्तारी के बाद बानी को अदालत में पेश किया जाएगा, और इसके साथ ही इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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