“आईआईटी कानपुर में आयोजित “भारत के विकास में नवाचार की भूमिका” कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नवाचार के महत्व पर जोर दिया। कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में तकनीकी प्रगति पर विचार साझा किए।”
कानपुर । आज आईआईटी कानपुर में “भारत के विकास में नवाचार की भूमिका” विषय पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें भारत के उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवाचार के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर और प्रगतिशील बनाने पर विचार-विमर्श करना था।
उपराष्ट्रपति का संबोधन: स्मार्ट और टिकाऊ नवाचार पर जोर
श्री धनखड़ ने अपने संबोधन में नवाचार की आवश्यकता और इसके दीर्घकालिक प्रभाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नवाचार का मतलब केवल नई तकनीक का विकास नहीं, बल्कि समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नए विचारों को अपनाना है।
उन्होंने कृषि में तकनीकी सुधार का महत्व बताया और किसानों के लिए नवाचार-आधारित समाधानों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। साथ ही, आईआईटी कानपुर के योगदान को सराहते हुए उन्होंने इसे 400 से अधिक स्टार्टअप्स का समर्थन करने वाला संस्थान बताया, जिसमें महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को भी शामिल किया गया है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की प्रेरणादायक बातें
श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने छात्रों को समाज की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नवाचार को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत के कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में आईआईटी जैसे संस्थानों की भूमिका अहम है।
उन्होंने भरोसा जताया कि सही मार्गदर्शन के साथ भारत 2047 तक आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
आईआईटी कानपुर के निदेशक की बात
संस्थान के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि तकनीकी नवाचारों के माध्यम से समाज के लाभ के लिए काम करना आईआईटी कानपुर का मिशन है। इस दिशा में उपराष्ट्रपति द्वारा दिए गए विचार और सुझाव संस्थान को प्रेरित करेंगे।
कार्यक्रम में विशेष उपस्थिति
इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष श्री सतीश महाना, खादी और ग्रामोद्योग मंत्री श्री राकेश सचान, उप निदेशक प्रो. ब्रज भूषण, और बड़ी संख्या में फैकल्टी, कर्मचारी और छात्र शामिल रहे।
नवाचार के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
इस कार्यक्रम ने तकनीकी और सामाजिक नवाचार के महत्व को रेखांकित किया। उपराष्ट्रपति धनखड़ के विचारों ने छात्रों और शोधकर्ताओं को प्रेरित किया कि वे ऐसे नवाचार करें, जो भारत को न केवल आत्मनिर्भर बनाएं बल्कि एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करें।
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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल