Tuesday , August 4 2020

त्रेता युग की याद दिला रही आज की अयोध्‍या, पुत्रेष्टि यज्ञ से लेकर राज्याभिषेक तक की मूर्तियां

अयोध्या। अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम को लेकर चारों तरफ उल्लास का वातारण देखने को मिल रहा है। एक तरफ आयोजन से जुड़ी तैयारियों को तेजी से पूरा किया जा रहा है, तो दूसरी ओर अभी से वातावरण राममय हो गया है। भजन, कीर्तन से लेकर लोग अपने-अपने स्तर से शिलान्यास के पल को यादगार बनाने में जुटे हैं। 04 और 05 अगस्त को रामनगरी के प्रत्येक परिवार में पांच-पांच दीपक जलाने का संकल्प लिया गया है। नगर के विभिन्न मठ मंदिरों में 05 अगस्त को दिन में सुंदरकांड व अखंड रामायण का पाठ किया जाएगा। इसके साथ ही भूमि पूजन के मौके पर रामनगरी में घर-घर भगवान राम के चित्रों वाले भगवा ध्वज लगाए जाएंगे।

रामलला हर दिन अलग-अलग रंगों की पहनेंगे पोशाक

रामादल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्कि राम ने कहा कि रामलला की पोशाक तैयार हो चुकी है। इसे मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास जी को सौंपा जा रहा है। 05 अगस्त को प्रधानमंत्री मंदिर का शिलान्यास करेंगे। उन्होंने खुद कई बार कहा है कि जिस चीज का वह शिलान्यास करते हैं उसका उद्घाटन भी करते हैं।

वहीं रामलला की पोशाक तैयार करने वाले दर्जी भगवत प्रसाद ने बताया कि पंडित कल्कि राम ने पोशाक के लिए ऑर्डर दिया था। सोमवार के लिए सफेद, मंगलवार के लिए लाल और बुधवार के लिए हरे रंग की विशेष पोशाक तैयार की गई है। केसरिया रंग की पोशाक भी तैयार है। भगवत प्रसाद रामलला के प्रमुख दर्जी हैं। उन्होंने बताया कि पिछली चार पीढ़ियों से उनके यहां से रामलला का वस्त्र सिला जाता है। जो पोशाक तैयार हुई है, उसमें नवरत्न भी लगाये गए हैं। 

पुत्रेष्टि यज्ञ से लेकर राज्याभिषेक तक की मूर्तियां होंगी आकर्षण का केन्द्र

अयोध्या में रामसेवकपुरम में वर्ष 2013 से रामायण के दृश्यों से जुड़ी मूर्तियां बना रहे मूर्तिकार रंजीत मंडल भी शिलान्यास कार्यक्रम को लेकर बेहद उत्साहित हैं। रंजीत के पिता नारायण चंद्र मंडल भी 2015 से उनकी सहायता कर रहे हैं। रंजीत बताते हैं कि राम मंदिर के परिसर में पुत्रेष्टि यज्ञ से राज्याभिषेक तक की मूर्तियां लगाई जाएंगी। सीताहरण तक की मूर्तियां तैयार हो गई हैं। ये मूर्तियां बांग्ला और उत्तर प्रदेश दो शैली से बनाई गई हैं। कपड़े बंगाली शैली से और चेहरे की भाव-भंगिमाएं यूपी शैली से बनाई गई हैं। राम कथा कुंज के आधार पर ये मूर्तियां तैयार की जा रही हैं।

मूर्तियां बनाने से पहले कई धार्मिक पुस्तकों का किया अध्ययन

खास बात है कि जब विहिप के नेताओं ने रंजीत से भगवान राम के जीवन से जुड़े दृश्यों की मूर्तियां बनाने की इच्छा जतायी थी तो इसके लिए उन्होंने बाकायदा रिसर्च करने के लिए  रामचरितमानस, रामायण और तस्वीरों वाली धार्मिक किताबों का अध्ययन किया। मूर्तियों में जीवंतता लाने के लिए रंजीत ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु़ में भगवान राम से जुड़े हुए धार्मिक स्थलों की यात्रा की। इन स्थलों पर काफी वक्त गुजारा। फिर वापस अयोध्या आकर मूर्तियां बनाना शुरू किया। मूर्तियों के माध्यम से रामायण का कोई एक दृश्य बनाया जाता है। ऐसे में इन्हें बनाने में वक्त लगता है।

असम से रहने वाले रंजीत ने फाइन आर्ट्स में एमए किया है। 1997 में रंजीत की मुलाकात विहिप के तत्कालीन अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल से असम में हुई। सिलचर में रंजीत ने महर्षि व्यास की मूर्ति बनाई थी। इसे देखकर सिंहल काफी प्रभावित हुए। इसके बाद उन्होंने रंजीत को दिल्ली बुलाया। 1998 में रंजीत दिल्ली आए। यहां सिंघल ने उन्हें अयोध्या में रामकथा कुंज के लिए मूर्तियां बनाने की बात कही। विहिप से जुड़ने के बाद उसके कई मंदिरों और कार्यालयों के लिए रंजीत ने मूर्ति बनाई। दिल्ली में आरके पुरम में विहिप कार्यालय में लगी हनुमानजी की मूर्ति भी रंजीत ने ही बनाई है।

कोरोना को लेकर रामनगरी को फायबिग्रेड की गाड़ियां कर रहीं सैनेटाइज

राम मंदिर के भूमिपूजन से पहले अयोध्या में सैनिटाइजेशन का काम तेजी से किया जा रहा है। इसके लिए उत्तर प्रदेश फायर सर्विस की मदद ली जा रही है। फायर सर्विस के उपनिरीक्षक प्रदीप पांडेय के मुताबिक इस काम में फायर सर्विस की 10-15 गाड़ियां लगी हैं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए रामनगरी को सैनिटाइज करने का काम किया जा रहा है।

सौंदर्यीकरण के बाद त्रेतायुग का दिख रहा नजारा

वहीं राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम से पहले अयोध्या में सौंदर्यीकरण के काम को भी तेजी से पूरा किया जा रहा है। इनको देखकर महंत रामप्रवेश दास बताते हैं कि इस तैयारियों से ऐसा लग रहा है जैसे हम त्रेता युग में हैं। हम सबको प्रसन्नता है कि अयोध्या में राम मंदिर की नींव पड़ने जा रही है।

151 से ज्यादा पवित्र नदियों का जल लेकर अयोध्या पहुंचे भाई

शिलान्यास कार्यक्रम को लेकर लोगों को उत्साह देखते बन रहा है। दो भाई राधे श्याम पांडेय और शब्द वैज्ञानिक महाकवि त्रिफला राम मंदिर की नींव में डालने के लिए 151 से ज्यादा पवित्र नदियों का जल लेकर अयोध्या पहुंचे हैं। 70 वर्ष से अधिक उम्र के शब्द वैज्ञानिक महाकवि त्रिफला बचपन से ही देख नहीं सकते हैं। राधे श्याम बताते हैं कि वह भारत की 151 नदियों, 8 नद, 3 समुद्र का जल लेकर आये हैं। वह श्रीलंका की 16 ​स्थानों की पवित्र मिट्टी, 5 समुद्र और 15 नदियों का जल भी लाये हैं। इसके लिए उन्होंने पैदल, साइकिल और ट्रेन से लेकर हवाई जहाज से यात्रा की थींं। उन्होंने 1968-2019 तक यात्रा करके ये सब इकट्ठा किया है।

5,100 मिट्टी के कलश दीपों से किए जाएंगे सुसज्जित

वहीं आयोजन को लेकर साकेत महाविद्यालय से अयोध्या मार्ग पर कलश लगाए जाएंगे। इसके लिए अयोध्या महोत्सव न्यास 5,100 मिट्टी के कलश को कलात्मक ढंग से सुसज्जित कर रहा है। मिट्टी के घड़ों को कलात्मक ढंग से रंगों, कपड़ों, गोटों, आम के पल्लों और दीपों से सुसज्जित कर इनको तैयार किया जा रहा है। अयोध्या महोत्सव न्यास के अध्यक्ष हरीश कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक यह कलश जनपद की विभिन्न संस्थाओं से जुड़े कलाकार अयोध्या महोत्सव न्यास के पदाधिकारी एवं संस्कार भारती के सदस्य निर्मित कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री लेंगे व्यवस्थाओं का जायजा, कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सोमवार को अयोध्या का दौरा करने की प्रबल संभावना है, जहां वह व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे। मुख्यमंत्री रविवार को ही अयोध्या जाने वाले थे। लेकिन, कोरोना संक्रमण के कारण कैबिनेट मंत्री कमल रानी वरुण के निधन के ही बाद उन्होंने दौरा स्थगित कर दिया।

भूमि पूजन कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के तहत 03 अगस्त को नगर की सीमाएं सील कर दी जाएंगी। वहीं, सुरक्षा के लिए भारी भरकम फोर्स तैनात की जाएगी। 04 व 05 अगस्त को अयोध्या की सुरक्षा में 3,500 पुलिसकर्मी, 40 कंपनी पीएसी, 10 कंपनी आरएएफ, दो डीआईजी व आठ पुलिस अधीक्षक तैनात रहेंगे। सुरक्षा की कमान एडीजी कानून व्यवस्था संभालेंगे।

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