केजीएमयू: ग्रीन कॉरीडोर बनाकर 23 मिनट में एयरपोर्ट पहुंचा लीवर, दिल्ली रवाना

unnamed (1)लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ गयी है। केजीएमयू के चिकित्सकों ने गुरूवार को ब्रेन डेड व्यक्ति का सफल आपरेशन कर एक और जिंदगी को बचाने के प्रयास में लगे हैं।लखनऊ यातायात पुलिस के सहयोग से केजीएमयू से चिकित्सकों की टीम मात्र 23 मिनट में अमौसी एअरपोर्ट पहुंच गयी। इसके लिए केजीएमयू से लेकर अमौसी एअरपोर्ट तक ट्रैफिक पुलिस ने ग्रीन काॅरीडोर बनाया था। चिकित्सकों ने ब्रेन डेड व्यक्ति की मौत के बाद उसका लीवर किसी की जिंदगी को बचाने के लिए दिल्ली भेजा है। वहीं, उसकी दोनों किडनियां लखनऊ के एसजीपीजीआई भेजी गयी हैं।

एक एंबुलेंस लीवर लेकर सुबह 11 बजे केजीएमयू से रवाना हुई और 23 मिनट में अमौसी एयरपोर्ट पहुंची। एसपी ट्रैफिक हबीबुल हसन के मुताबिक ग्रीन कॉरीडोर बनाने के लिए केजीएमयू से हजरतगंज, राजभवन, अहिमामऊ और शहीदपथ होते हुए एयरपोर्ट ले जाने का रूट मैप तैयार किया गया था। इसके लिए हर चेक प्वाइंट और चैराहों पर दो-दो पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके अलावा एंबुलेंस के आगे एक इंटरसेप्टर लगी थी जो आगे-आगे चल रही थी।  गौरतलब हो कि गोरखपुर के रहने वाले सुंदर सिंह की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके बाद उनके परिवार ने उनका अंगदान करने की ठानी। केजीएमयू के डॉ. अभिजीत चंद्रा के नेतृत्व में यह ट्रान्सप्लान्ट किया गया।  लीवर निकालने के बाद उसे एक लाल रंग के विशेष बॉक्स में रखा गया। इस बॉक्स में ऑर्गन प्रिजर्वेटिव सॉल्यूशन और बर्फ के मिश्रण में लीवर को रखा गया। ऑर्गन डोनेट के बाद लीवर की 6 घंटे और किडनी की 24 घंटे की लाइफ होती है।

कुलपति ने पूरी प्रक्रिया पर बनाये रखी नजर-
एक तरफ केजीएमयू के चिकित्स डॉ. अभिजीत चन्द्र के अगुवाई में डॉ. विवेक गुप्ता,डॉ.परवेज,डॉ.मनमीत सिंह,डॉ.साकेत कुमार,डॉ.प्रदीप जोशी और डॉ. विशाल गुप्ता बे्रन डेड व्यक्ति का आपरेशन कर लीवर तथा किडनी सुरक्षित करने में लगे थे। वहीं केजीएमयू के कुलपति प्रो.रविकांत पूरे समय आपरेशन प्रक्रिया के साथ लीवर तथा किडनी को एअरपोर्ट पहुंचाये जाने तक नजर बनाये रखी। केजीएमयू के उप चिकित्सा अधीक्षक डा. वेद प्रकाश ने बताया कि पहले भी हमारे संस्थान में ट्रांसप्लांट हुए हैं। कुछ दिक्कतों की वजह से बीच में प्रक्रिया बाधित हुई थी। अब हम फिर से मरीज को नया जीवन देने की दिशा में काम कर रहे हैं।

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