नई दिल्ली । गवर्नर रघुराम राजन ने मार्च तक मुद्रास्फीति लक्ष्य से ऊपर रहने के जोखिम का जिक्र करते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, हालाकि उन्होंने आज यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक का नीतिगत रख उदार बना हुआ है। मौद्रिक नीति का रख उदार बना हुआ है और (केंद्रीय बैंक) धन की उपलब्धता के पर्याप्त प्रावधान पर जोर देता रहेगा। रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर केंद्रीय बैंक बैंकों को उनकी फौरी जरूरत के लिए धन उधार देता है। यह इस समय 6.5 प्रतिशत है। इसी के अनुसार रिवर्स रेपो छह प्रतिशत पर बनी हुई है।बैंक ने आरक्षित नकदी-अनुपात (सीआरआर) भी चार प्रतिशत पर बरकार रखा है। सीआरआर के तहत बैंकों को अपने पास जामा राशियों का निर्धारित हिस्सा केंद्रीय बैंक के नियंत्रण में रखना पड़ता है और इस पर उन्हें ब्याज नहीं मिलता। राजन ने कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति, सेवाओं की महंगाई और सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के कार्यान्वयन के असर के कारण जोखिम है कि मार्च 2017 तक खुदरा मुद्रास्फीति पांच प्रतिशत तक सीमित रखने के लक्ष्य के उपर रह सकती है। जून में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 22 महीने के उच्चतम स्तर 5.8 प्रतिशत पर पहुंच गई।आरबीआई ने कहा कि जोरदार बुवाई और मानसून की सकारात्मक प्रगति खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी के लिए अच्छा संकेत हालांकि दालों और अनाजों की कीमत बढ़ रही है। डिप्टी गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच मुद्रास्फीति का एक लक्ष्य तय करने के विधिवत ढांचे पर समक्षौते से इस तरह की राय को और बल मिला।नयी व्यवस्था के तहत मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का ढांचा लागू किए जाने से पहले गवर्नर के नेतत्व में आरबीआई द्वारा मौद्रिक नीति की घोषणा का आज यह आखिरी मौका था। मौद्रिक नीति की पहल अब छह सदस्यीय एमपीसी करेगी जिसमें रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार के तीन तीन प्रतिनिधि होंगे। आरबीआई ने वस्तु एवं सेवा कर संविधान संशोधन विधेयक पारित किए जाने का आज यह कहते हुए स्वागत किया कि यह आर्थिक सुधारों के प्रति राजनैतिक आम सहमति की दिशा में एक शुभ संकेत है।