“भारत-चीन सीमा विवाद पर एस. जयशंकर ने संसद को बताया कि पूर्वी लद्दाख में तनाव कम हुआ है। देपसांग और डेमचोक में सेनाओं की वापसी पर समझौता हुआ। रिश्ते सुधारने की कोशिश जारी।“
भारत-चीन सीमा विवाद: रिश्तों में मामूली सुधार, लेकिन विवाद बरकरार
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को संसद में भारत-चीन सीमा विवाद पर बयान देते हुए कहा कि गलवान झड़प के बाद से रिश्ते सामान्य नहीं रहे हैं। हालांकि, हालिया वार्ताओं और समझौतों से स्थिति में मामूली सुधार हुआ है।
मुख्य बातें:
- डेमचोक और देपसांग पर समझौता:
दोनों देशों की सेनाओं ने अक्टूबर 2024 में डेमचोक और देपसांग से पीछे हटने का समझौता किया। दोनों पक्ष अप्रैल 2020 की स्थिति में लौटेंगे। - गलवान झड़प का प्रभाव:
जून 2020 में गलवान घाटी में झड़प के बाद भारत-चीन के बीच संबंध बिगड़ गए। 45 साल बाद सीमा पर ऐसी घटना हुई थी। - 75% विवाद का समाधान:
जयशंकर ने सितंबर 2024 में बताया कि सीमा विवाद का 75% समाधान हो चुका है, लेकिन सैन्यीकरण का मुद्दा गंभीर बना हुआ है। - बैठकों का दौर:
अब तक दोनों देशों के बीच 38 उच्च-स्तरीय बैठकें हुई हैं। इनमें से 17 बैठकें राजनयिक स्तर पर और 21 बैठकें सैन्य स्तर पर हुई हैं। - भारत का रुख:
भारत ने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए स्पष्ट किया कि समाधान ऐसा होना चाहिए जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो।
पृष्ठभूमि:
1962 के युद्ध के बाद चीन ने 38,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। इसके अतिरिक्त, 1963 में पाकिस्तान ने 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय जमीन चीन को सौंप दी थी।
भविष्य की दिशा:
दोनों देशों ने आपसी विश्वास बहाली के लिए 1993, 1996, और 2005 में समझौते किए थे, लेकिन वे नाकाम रहे। अब नई पहल के तहत अप्रैल 2020 की स्थिति बहाल करने पर सहमति बनी है।
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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल