केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में गुरुवार को ऐलान किया कि सड़क हादसों में घायलों के लिए शुरू की गई मुफ्त इलाज योजना अब पूरे देश में लागू की जाएगी।
पहले छह राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चल रही इस योजना का विस्तार अब अगले साल से पूरे भारत में होगा। उत्तर प्रदेश में इस योजना की शुरुआत इस महीने से की जाएगी।
गडकरी ने बताया कि इस योजना के तहत सड़क हादसे के शिकार व्यक्ति को त्वरित उपचार के लिए डेढ़ लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। उन्होंने कहा कि इस योजना के जरिए अब तक 2100 लोगों की जान बचाई जा चुकी है। असम, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तराखंड और पुडुचेरी जैसे राज्यों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सफलतापूर्वक चलाया गया है।
इस योजना के लागू होने से दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित और प्रभावी उपचार मिल सकेगा, जो सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करने में मदद करेगा। गडकरी ने इस पर जोर दिया कि सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी के बावजूद कानून के प्रति लोगों में सम्मान और भय की कमी है।
सड़क हादसों पर गडकरी का गहरा अफसोस
गडकरी ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का जिक्र करते हुए कहा कि जब भी वह सड़क हादसों पर चर्चा करने जाते हैं, तो उन्हें अपनी भारतीय स्थिति छिपानी पड़ती है। उन्होंने कहा, “हमारा रिकॉर्ड इस मामले में सबसे खराब है, और मुझे चेहरा छिपाने की कोशिश करनी पड़ती है।”
सड़क हादसों में 60 प्रतिशत युवा जान गंवाते हैं
गडकरी ने यह भी बताया कि सड़क हादसों में मरने वाले 60 प्रतिशत लोग 18 से 34 वर्ष की आयु के होते हैं। इस वर्ष अब तक 1.78 लाख लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं, जो पिछले साल के डेढ़ लाख से कहीं अधिक है। गडकरी ने यह भी कहा कि हर साल केवल हेलमेट न पहनने के कारण 30,000 लोग अपनी जान गंवाते हैं।
योजना का उद्देश्य सड़क हादसों में घायल व्यक्तियों को समय रहते और मुफ्त इलाज मुहैया कराना है, ताकि दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को घटाया जा सके और अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।