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महाराष्ट्र में ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ नारे पर मचा राजनीतिक घमासान, फडणवीस बोले- MVA की तुष्टिकरण राजनीति का जवाब

महाराष्ट्र। महाराष्ट्र में आगामी चुनावों के बीच ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ नारे ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। इस नारे को लेकर बीजेपी और उसके सहयोगी नेताओं के अलग-अलग विचार सामने आए हैं। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने इस नारे का समर्थन करते हुए इसे महाविकास अघाड़ी (MVA) की तुष्टिकरण नीति का जवाब बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नारे का उद्देश्य केवल समुदायों के बीच एकता को बढ़ावा देना है।

फडणवीस ने कहा कि यह नारा “कांग्रेस और MVA की तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ” है, जहां चुनावी लाभ के लिए मस्जिदों और पोस्टर्स का उपयोग किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि “एकता से ही सुरक्षा संभव है,” और इस नारे का मतलब किसी समुदाय के प्रति घृणा से नहीं है।

बीजेपी की ही नेता पंकजा मुंडे और अशोक चव्हाण ने इस नारे के खिलाफ आवाज उठाई। मुंडे ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए। अशोक चव्हाण ने भी इस नारे की निंदा की और कहा कि “महाराष्ट्र की जनता को इस तरह के विभाजनकारी नारों की जरूरत नहीं है।”

इससे पहले अजित पवार ने 9 नवंबर को इस नारे का विरोध करते हुए कहा था कि, “यह उत्तर प्रदेश में चल सकता है, महाराष्ट्र में नहीं। हमारी नीति ‘सबका साथ, सबका विकास’ पर आधारित है।”

अजित पवार और पंकजा मुंडे ने महाराष्ट्र की सामाजिक समरसता पर जोर दिया, जो छत्रपति शिवाजी महाराज, राजर्षि शाहू महाराज और महात्मा फुले जैसे महापुरुषों से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की तुलना अन्य राज्यों से नहीं की जा सकती है, और यहां की राजनीति एकता और सामाजिक समरसता के आधार पर है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी पर इस नारे के माध्यम से विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया। खड़गे ने नागपुर में कहा कि “योगी आदित्यनाथ का बयान एक धर्म को दूसरे धर्म के खिलाफ खड़ा करने का प्रयास है।” खड़गे ने मनुस्मृति का भी उल्लेख करते हुए कहा कि “बीजेपी की नीति विभाजनकारी है, और यह विचारधारा को समाप्त करने का समय है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 5 अक्टूबर को ठाणे की एक रैली में इसी मुद्दे पर बात करते हुए कहा था, “कांग्रेस और उनके सहयोगियों का मिशन बांटों और सत्ता में रहो है। यदि हम एक नहीं रहे, तो बांटने वाले इसका लाभ उठाएंगे।” मोदी ने कहा कि देश की एकता ही उसकी ताकत है, और महाराष्ट्र में भी यही संदेश दिया गया है।

महाराष्ट्र की चुनावी राजनीति में ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ नारा गहरी सियासी खाई को दर्शाता है। बीजेपी इसे एकता का प्रतीक मानते हुए इसे एमवीए की तुष्टिकरण की राजनीति का जवाब बता रही है, जबकि विपक्षी नेता इसे विभाजनकारी नारा मान रहे हैं। चुनावों से पहले इस मुद्दे पर चल रही बयानबाजी महाराष्ट्र की राजनीति में किस दिशा में असर डालेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

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