यूपी के दोनों सदनों में विपक्ष का जोरदार हंगामा

%e0%a4%a8%e0%a4%9aलखनऊ। विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के पहले दिन बुधवार को दोनों सदनों में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया।

दोनों सदनों में भाजपा सदस्यों ने जहां संसदीय कार्य मंत्री आजम खां से इस्तीफे की मांग को लेकर, वहीं बसपा सदस्यों ने गन्ना किसान व कानून-व्यवस्था को लेकर हंगामा किया।

विधान परिषद में शिक्षक दल के सदस्यों ने पुरानी पेंशन बहाली तथा पुलिस की बर्बर पिटाई से दिवंगत हुए डा. राम आशीष के परिजनों को एक करोड़ की अनुग्रह राशि और हत्यारों को सजा दिलाने की मांग को लेकर हंगामा किया।

इस हंगामे के कारण जहां दोनों सदनों प्रश्नकाल नहीं हो सका, वहीं विधानसभा की कार्यवाही एक बार तथा विधान परिषद की कार्यवाही दो बार स्थगित हुई। इसी हंगामे के बीच दोनों सदनों में सरकार ने अनुपूरक बजट पेश किया।

विधानसभा में सदन की कार्यवाही शुरू होते विपक्ष के सदस्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए। सरकर के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भाजपा ने संसदीय कार्य मंत्री मोहम्मद आजम खां के उस बयान पर इस्तीफा देने की मांग की जो उन्होंने बुलंदशहर रेप कांड पर दिया था। बसपा के सदस्यों ने गन्ना किसान और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला बोला और वेल में हंगामा करने लगे।

बसपा और भाजपा के सदस्य हाथों में पोस्टर लिए हुए थे। हंगामे के चलते विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडे ने सदन की कार्यवाही को 12.20 तक के लिए स्थगित कर दिया। भाजपा के दलीय नेता सुरेश खन्ना ने कहा कि बुलंदशहर में हुए सामूहिक बलात्कार के मामले में जो टिप्पणी आजम खां ने की थी, उस पर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बिना शर्त आजम खां को सुप्रीम कोर्ट मे माफी मांगनी पड़ी।

सरकार में बैठे मंत्री का यह आचरण उसे मंत्रिमंडल में बने रहने का अधिकार नहीं देता है। आजम खां को बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर मुददे पर यह सरकार पूरी तरह से फेल हो गई है। सरकार जल्दबाजी में आधी-अधूरी परियोजनाओं का शिलान्यास और उदघाटन करने में लगी है।

नेता प्रतिपक्ष बसपा के गयाचरण दिनकर ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था का बुराहाल है। महिलाएं सुरक्षित नहीं है प्रदेश में कहीं भी कानून की हनक और इकबाल दिखाई नहीं पड़ रहा है।

12.20 पर जब दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो भाजपा के सदस्य आजम खां के इस्तीफे की मांग और बसपा सदस्य गन्ना किसानों के मुददे को लेकर दोबारा वेल में आ गए। इसी हंगामें के बीच मुख्यमंत्री ने सदन में अनुपूरक और लेखानुदान की मांग सदन में प्रस्तुत की। संसदीय कार्य मंत्री आजम खां ने कहा कि कोई मेरे इस्तीफे की मांग कर रहा है मैने तो कुछ कहा ही नहीं।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बगैर कहा कि जिसने दो साल में 80 करोड़ के कपड़े पहन लिए वो कहते है कि मेरे झोले में कुछ नहीं है जबकि सब कुछ इन्हीं के झोले में है। पूरे देश को नंगा कर दिया और लाइन में लगा दिया है।

इधर, विधान परिषद में बहुजन समाज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, निर्दलीय शिक्षक समूह समेत कांग्रेस के सदस्यों ने वेल में हंगामा किया। इसके चलते प्रश्न प्रहर नहीं हो सका। सभापति रमेश यादव ने सदन को पहले बीस मिनट के लिये स्थगित किया। उसके बाद सदन के स्थगन का समय बारह बजकर दस मिनट तक के लिए बढ़ा दिया गया।

दोबारा सदन की बैठक शुरू होने पर भी सदस्य फिर वेल में हंमागा करते रहे और उसी हंगामे और शोर-शराबे के बीच ही राज्य सरकार ने वित्तय वर्ष 2016-17 के द्वितीय अनुपूरक अनुदान की मांगों और वित्तीय वर्ष 2017-18 के आय-व्ययक को सदन के पटल पर रखा।

इसके पूर्व सदन की कार्यवाही शुरू होते ही बसपा, भाजपा, निर्दलीय समूह के सभी सदस्य एवं शिक्षक दल के ध्रुव कुमार त्रिपाठी वेल में आ गये। बहुजन समाज पार्टी के नेता और नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा प्राथमिकता के आधार पर उन्हें सुन लिया जाये। इसके बाद बसपा के सभी सदस्य वेल में आ गये।

सदस्य दंगाइयों की सरकार बर्खास्त करो, किसानों पर अत्याचार करनेवाली सरकार को बर्खास्त करो, दलितविरोधी यह सरकार नहीं चलेगी-नहीं चलेगी के नारे लगा रहे थे। वहीं भारतीय जनता पार्टी के सदस्य बुलन्दशहर काण्ड का मामला उठाते हुए बुलन्दशहर काण्ड पर, महिलाओं के अपमान पर, आजम खां इस्तीफा दो के नारे लिखे हुए पोस्टर हाथों में लिये थे।

निर्दलीय शिक्षक समूह के सदस्य पुरानी पेंशन बहाली और पुलिस की बर्बर पिटाई से दिवंगत हुए डा. राम आशीष के परिजनों को एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि और हत्यारों को सजा दिलाने की मांग कर रहे थे। कांग्रेस के दोनों सदस्य दिनेश प्रताप सिंह और दीपक सिंह अपने-अपने स्थानों पर खड़े होकर विपक्ष की मांगों का समर्थन कर रहे थे।

सभापति रमेश यादव ने सदस्यों से बार-बार अपने-अपने स्थान पर वापस जाने का अनुरोध किया लेकिन सदस्य वेल में ही नारेबाजी और हंगामा करते रहे। इस पर सभापति ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

 

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