व्रत रखने से मन की होती है शुद्धि!

ma-kusलखनऊ। चल रहे नवरात्रि महोत्सव में अलीगंज में पंडित मिश्रा ने नवरात्र के तीसरे दिन चंद्रघंटा की पूजा अर्चना करने का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि इस नवरात्र पर व्रत रखने वाले भक्तों की हर मनोकामनाएं पूरी होगी। उन्होंने बताया कि सोमवार के दिन तेल मर्दन, मालिश करने से कान्ति बढ़ती है। आम के दिन क्षौरकर्म ,बाल, दाढी काटने या कटवाने से शिवभक्ति की हानि होती है। पंडित शक्ति मिश्रा ने कहा कि नवरात्र का तीसरा दिन हैं जिसमे माँ माँ चंद्रघंटा देवी की पूजा अर्चना की जाती हैं ।

नवरात्रि में दुर्गासप्तशती का पाठ करना चाहिए

मिश्रा ने कहा कि अगर दुर्गासप्तशती का पाठ न कर सके तो ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मन्त्र का कम से कम 108 बार जप अवश्य करें।
प्रत्येक नवरात्रि में यज्ञपवीत नये धारण करना चाहिए नवरात्रि में दन्त साफ करने के ब्रश बदल देने चाहिये। नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखने वालों को दाढ़ी,मूंछ और बाल नहीं कटवाने चाहिए। नौ दिनों तक नाखून नहीं काटने चाहिए। इस दौरान खाने में प्याज, लहसुन और निरामिष, नॉन वेज, बिल्कुल न खाएं। नौ दिन का व्रत रखने वालों को काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए। व्रत रखने वाले लोगों को बेल्ट, चप्पल, जूते, बैग जैसी चमड़े की चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए । व्रत में नौ दिनों तक खाने में अनाज और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।
खाने में दूध, कुट्टू का आटा, समारी के चावल सिंघाड़े का आटा, सेंधा नमक, फ ल, आलू, मेवे, मूंगफ ली खा सकते हैं । विष्णु पुराण के अनुसार, नवरात्रि व्रत के समय दिन में सोने, तम्बाकू चबाने और शारीरिक संबंध बनाने से भी व्रत का फ ल नहीं मिलता है ।
यदि कोई पूरे नवरात्र के उपवास न कर सकता हो तो प्रतिपदा , सप्तमी, अष्टमी और नवमी . तीन दिन उपवास करके देवी की पूजा करने से वह नवरात्र के उपवास के फ ल को प्राप्त करता है ।

नवरात्र पर जागरण

नवरात्र पर उत्तम जागरण वह है जिसमें शास्त्र, अनुसार चर्चा हो, दीपक हो, भक्तिभाव से युक्त माँ का कीर्तन हो, वाद्य ताल आदि से युक्त सा्त्विक संगीत हो, प्रसन्नता हो, सा्त्विवक नृत्य हो, ऐसा नहीं कि डिस्को या अन्य कोई पाश्चात्य नृत्य किया जाए।

मुहूर्त शारदीय नवरात्रि का वर्णन

पंडित शक्ति ने बताया कि इस वर्ष का शारदीय नवरात्रि पूरे 10 दिन का है
3 अक्टूबर 2016 दिन सोमवार .ब्रह्मचारिणी देवी दर्शन
4 अक्टूबर 2016 दिन मंगलवार .चंद्रघण्टादेवी दर्शन
5 अक्टूबर 2016 दिन बुधवार . कूष्माण्डा देवी दर्शन
6 अक्टूबर 2016 दिन गुरुवार .स्कन्दमाता देवी दर्शन
7 अक्टूबर 2016 दिन शुक्त्रवार.कात्यायनी देवी दर्शन
8 अक्टूबर 2016 दिन शनिवार . कालरात्रि देवी दर्शन
9 अक्टूबर 2016 दिन रविवार .महाष्टमी व्रत, अन्नपूर्णा देवी दर्शन
10 अक्टूबर 2016 दिन सोमवार, सिद्धिदात्री देवी दर्शन, नवमी का हवन, बलिदान और पूजन
11 अक्टूबर 2016 दिन मंगलवार, नवरात्रि व्रत की पारणा विजय दशमी

पंडित शक्ति मिश्रा ने बताया कि माँ दुर्गा की भक्त का मन मणिपूर चक्र में प्रविष्ट होता है। मां चंद्रघंटा की कृपा से भक्त के समस्त पाप और बाधाएँ नष्ट हो जाती हैं। माँ चन्द्रघण्टा की पूजा से भक्त को सदा शुभ कार्य करने को मिलता हैं । माँ भक्तों के कष्ट का निवारण शीघ्र ही कर देती हैं। माता का भक्त सिंह की तरह पराक्त्रमी और निर्भय हो जाता है। माता के घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों को प्रेतबाधा से रक्षा करती है। माता के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी लिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। माता का शरीर स्वर्ण के समान मिलता हैं। इनके दस हाथ हैं, दसों हाथों में खड्ग, बाण आदि शस्त्र सुशोभित रहते हैं, इनका वाहन सिंह है।

माँ चंद्रघंटा पूजन विधि
पंडित शक्ति मिश्रा ने कहाकि माता की चौकी, बाजो पर माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें। चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। इसके बाद पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारामां चंद्र घंटा सहित समस्त स्थापित देवताओं की पूजा करें। इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अर्ध्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प, हार, सुगंधित द्रव्य, धूप, दीप, नैवेद्य, फ ल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि आदि करें।

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