अफगानिस्तान के दिग्गज क्रिकेटर राशिद खान ने तालिबान सरकार के महिलाओं की मेडिकल ट्रेनिंग पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है। राशिद ने इसे न केवल महिलाओं के भविष्य, बल्कि पूरे समाज के लिए घातक बताया।
तालिबान ने सितंबर 2021 में सत्ता में आने के बाद महिलाओं की शिक्षा पर कई पाबंदियां लगाई थीं। पहले छठी कक्षा के बाद लड़कियों की स्कूलिंग पर रोक, फिर दिसंबर 2022 में विश्वविद्यालय जाने पर प्रतिबंध और अब मेडिकल संस्थानों में महिलाओं के दाखिले पर पाबंदी। इस तानाशाही रवैये के खिलाफ राशिद खान ने एक्स पर अपनी आवाज बुलंद की।
राशिद का भावुक संदेश
राशिद खान ने लिखा,
“मैं अफगानिस्तान की बहनों और माताओं के लिए हाल ही में शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों के बंद होने पर गहरी उदासी और निराशा के साथ विचार कर रहा हूं। इस निर्णय ने न केवल उनके भविष्य को, बल्कि हमारे समाज के व्यापक ताने-बाने को भी गहराई से प्रभावित किया है।”
उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता किसी भी समाज के विकास के लिए अनिवार्य है। राशिद ने तालिबान सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए कहा,
“हमारी बहनों और माताओं के लिए चिकित्सा पेशेवरों द्वारा प्रदान की जाने वाली देखभाल तक पहुंच होना जरूरी है। शिक्षा हर व्यक्ति का अधिकार है, जो न केवल सामाजिक जिम्मेदारी बल्कि एक नैतिक दायित्व भी है।”
तालिबान की पाबंदियों ने छीन लिए अधिकार
तालिबान ने सत्ता में लौटने के बाद महिलाओं की आज़ादी पर लगातार रोक लगाई है। लड़कियों की पढ़ाई, काम करने और सार्वजनिक स्थानों पर बोलने तक के अधिकार छीन लिए गए हैं। नर्सिंग और मेडिकल ट्रेनिंग पर पाबंदी ने महिलाओं के लिए एक और दरवाजा बंद कर दिया है।
समाज की प्रगति के लिए जरूरी है शिक्षा
राशिद खान ने अपनी अपील में इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को शिक्षा से वंचित रखना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे देश के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य का अधिकार हर महिला का मूल अधिकार है।
राशिद खान जैसे वैश्विक स्टार की यह अपील तालिबान सरकार को सोचने पर मजबूर करेगी या नहीं, यह देखना बाकी है। लेकिन उनकी आवाज ने दुनियाभर में महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में एक नई उम्मीद जरूर जगाई है।